प्लानिंग और तकनीक से खेती सालाना 40 करोड़ का टर्नओवर

पंजाब-हरियाणा के गांवों को टक्कर दे रहा धार जिले का रूपाखेड़ा

जिले का 3500 की आबादी वाला रुपाखेड़ा गांव देश में उन्नत खेती का मॉडल बनकर सामने आया है।

बदनावर तहसील का यह गांव पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी और हाईटेक सब्जी उत्पादन के जरिए हर साल 35 से 40 करोड़ रुपए का टर्नओवर कर रहा है।

जहां कभी किसान सोयाबीन, कपास और गेहूं तक सीमित थे, वहां आज पॉलीहाउस और ग्रीन नेट के माध्यम से अमरूद, निम्बू, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, गुलाब, जरबेरा और शिमला मिर्च लिखी जा रही है।

इसी वजह से रूपाखेड़ा गांव पंजाब और हरियाणा के उन्नततील गांवों को सीधी टक्कर दे रहा है नीमच फोरलेन से नजदीकी का लाभ रूपाखेड़ा के किसानों को सीधे बाजार से जोड़ रहा है।

यहां की फसलें इंदौर, भोपाल, दिल्ली, अहमदाबाद जयपुर, उदयपुर, कोटा और जोधपुर की मंडियों तक रोजाना भेजी जा रही है।

 

लहलहा रहे फल, फूल व सब्जियां

अमरूद : 60 हेक्टेयर

नींबू : 70 हेक्टेयर

स्ट्रॉबेरी : 05 हेक्टेयर

ब्लूबेरी : 06 एकड़

फूल : 100 हेक्टेयर (22 प्रकार के)

सब्जियां : 30 एकड़ में

 

नौकरी छोड़ गांव लौटे

रूपाखेड़ा की सबसे बड़ी ताकत यहां के युवा किसान हैं।

कोरोना काल में शहरों की प्राइवेट नौकरियां छोड़कर यश पटेल, दिनेश पाटीदार, सुनील पाटीदार, श्रीराम पाटीदार जैसे युवा गांव लौटे और खेती को व्यवसाय बनाया।

बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं की नई सोच ने गांव में कृषि क्रांति ला दी।

 

रूपाखेड़ा क्यों खास

गांव में 40 पॉलीहाउस और 30 ग्रीन नेट हाउस हैं। करीब 2 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में हाईटेक बागवानी हो रही है।

वर्ष 2016 में मोहनलाल पाटीदार ने पहला पॉलीहाउस लगाया, इसके बाद 80 से अधिक किसानों ने आधुनिक खेती अपनाई।

 

दूसरे किसान भी सीखें

उद्यानिकी फसलों की सही प्लानिंग और आधुनिक तकनीक से खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है। रूपाखेड़ा के किसानों ने इसका उदाहरण पेश किया है। जिले के अन्य किसान भी यहां आकर सीखें।

नीरज सांवलिया, उप संचालक, उद्यानिकी विभाग, धार

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