बिना पानी के पौष्टिक हरा चारा तैयार
गोशाला में आधुनिक हाइड्रोपोनिक तकनीक के माध्यम से गायों के लिए पौष्टिक हरा चारा तैयार किया जा रहा है।
यह पहल आलोट तहसील के ग्राम खमरिया स्थित राडीवाली माता गोशाला में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित कन्हैया स्वयं सहायता समूह कर रहा है।
समूह की सदस्य टीना बामनिया ने बताया कि चारा उगाने की प्रक्रिया काफी सरल है। इसमें किसानों से खरीदे गए गेहूं को पहले साफ कर एक दिन पानी में भिगोया जाता है, फिर टाट में रखकर अंकुरित किया जाता है।
अंकुरित बीजों को प्लास्टिक ट्रे में फैलाकर फॉगर या ड्रिप सिस्टम से नमी दी जाती है। इस तकनीक से कम बीज में अधिक चारा तैयार होता है।
छोटी ट्रे में 250 ग्राम बीज से लगभग 2.5 किलो तथा बड़ी ट्रे में 1 किलो अनाज से लगभग 8 किलो हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है।
हर दिन 80 किलो चारा
हाइड्रोपोनिक यूनिट पर लगभग 80 हजार की लागत आई है। इससे प्रतिदिन करीब 80 किलो हरा चारा तैयार किया जा रहा है। यह गायों के लिए पौष्टिक माना जाता है। पशुओं के स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है।
युवाओं को दी जा रही ट्रेनिंग
गोशाला में आलोट कॉलेज के छात्र-छात्राएं जैविक खाद निर्माण और हाइड्रोपोनिक तकनीक से घास उगाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
मुनाफे का गणित
दो हेक्टेयर में हो रहा गोशाला का संचालन
गोशाला लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित है। करीब 260 गोवंश की देखभाल की जा रही है। गोशाला के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 22.47 लाख खर्च होते हैं।
इसमें भूसा व हरा चारा, खल, मजदूरी, हाइड्रोपोनिक यूनिट, बिजली-मोटर तथा दवाई आदि खर्च शामिल हैं।
कहां से कितनी आमदनी
गोशाला से प्रतिवर्ष लगभग 28.20 लाख की आय प्राप्त हो रही है, जिसमें 21 लाख रुपए शासकीय अनुदान, 2.80 लाख रुपए गोबर खाद से, 1.10 लाख रुपए जैविक खाद से, 2.60 लाख रुपए दान से तथा 70 हजार रुपए मत्स्य पालन से मिल रहे हैं।
इस प्रकार सालाना खर्च घटाने के बाद गोशाला को लगभग 5.73 लाख का शुद्ध लाभ हो रहा है।
