निमाड़ के नीम से रोजगार
दक्षिण भारत में पंधाना की निंबोली की मांग, तेल और पाउडर बनाने के लिए भेजे जा रहे बीज
पंधाना क्षेत्र में नीम के फल (निंबोली) ने इस बार समृद्धि की नई इबारत लिखी है। महिलाओं की जागरूकता और कड़ी मेहनत के बूते इस सीजन में उन्होंने रिकॉर्ड 1000 टन निंबोलियों का संग्रहण किया और उन्हें 19 से 19 रु. किलो में बेचकर लगभग 1.80 करोड़ रु. कमा लिए।
कृषि नमामि प्रोड्यूसर फार्मर कंपनी के अनुसार पंधाना क्षेत्र के इस नए आर्थिक बदलाव की कहानी पूरी तरह से जमीनी स्तर पर जुड़ी हुई है।
इस बार स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भारी मात्रा में निंबोलियों का संग्रहण किया है।
इसलिए भारी डिमांड…
इससे बने प्रोडक्ट कृषि और त्वचा रोग सहित बीमारियों की रोकथाम में उपयोग हो रहे नमामि के सीईओ सुनील पंडोले ने बताया पंधाना क्षेत्र से संग्रहित की गई ये निंबोलियां सीधे दक्षिण भारत (साउथ) के राज्यों में भेजी जा रही हैं।
नीम के इन फलों से मुख्य रूप से नीम का तेल निकाला जाता है। इसके अलावा नीम का पाउडर और नीम की खल्ली (नीम केक) जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं।
ये उत्पाद कृषि, त्वचा रोग सहित अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए उपयोग में लाए जाते हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है।
जानिए… निंबोली के फायदे
नीम का फल, जिसे निंबोली कहा जाता है, औषधीय गुणों का भंडार है। इसके निंबोली का तेल और पाउडर बनता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा की समस्याओं, बालों के झड़ने और कृषि में कीटनाशक के रूप में अत्यधिक फायदेमंद हैं।
निंबोली के तेल और पेस्ट में मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण त्वचा के संक्रमण और मुंहासों को ठीक करने में मदद करते हैं।
निंबोली से निकला तेल बालों की जड़ों को मजबूत करता है। जुओं और डैंड्रफ को खत्म करता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की सूजन, चकत्ते और फोड़े-फुंसियों को ठीक करने में असरदार हैं। इसके फल का उपयोग बवासीर जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए किया जाता है।
कल तक जो पेड़ कटते थे, आज उन्हें बचा रहे हैं लोग
पूरे पंधाना क्षेत्र में कम से कम 700 से 800 टन और मोटे तौर पर देखें तो करीब 1000 टन निंबोली संग्रहण का काम हुआ है।
बाजार में इस समय औसतन 18 से 19 रु. प्रति किलो का भाव चल रहा है। इस हिसाब से देखें तो क्षेत्र में बिना किसी अतिरिक्त लागत के कम से कम 1 करोड़ 80 लाख रुपए का व्यापार हुआ है।
यह पूरी राशि सीधे क्षेत्र की गरीब जनता और परिवारों के हाथों में पहुंची है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आ रहा है।
निंबोली संग्रहण के इस काम ने न केवल आर्थिक लाभ दिया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर एक बड़ी जागरूकता की मिसाल भी पेश की है।
अब नीम के बीजों का संग्रहण होने लगा है। इस काम के चलते नीम के पेड़ों को लेकर एक सकारात्मक चेतना आई है।
कल तक जो नीम के पेड़ को बेझिझक काट दिया करते थे, आज इस आर्थिक जुड़ाव और जागरूकता के कारण वह इसे काटने नहीं दे रहा है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक बेहद सकारात्मक और अनूठा बदलाव है।
