हूबहू रंग और नाम
स्कूल परिसर में छिपाकर रखी 250 बोरियां जब्त
किसानों के साथ धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ऊंचे मुनाफे के चक्कर में जैविक खाद को हूबहू रासायनिक डीएपी बनाकर बेचा जा रहा था।
ग्वालियर संभाग से आए 3 सदस्यीय विशेष दल और स्थानीय कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने गरिमा कॉन्वेंट स्कूल परिसर में दबिश देकर मेसर्स खालसा ट्रेडर्स के अवैध स्टॉक से 250 बैग (12.5 टन) नकली डीएपी जब्त किया।
चंदेरी पुलिस ने फर्म के संचालक बहादुर सिंह भुल्लर पर धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।
चंदेरी में नकली खाद के इस काले कारोबार की शिकायत सीधे संभाग स्तर पर हुई थी। इसके बाद एक्टिव हुए 3 सदस्यीय दल ने चंदेरी पुलिस के साथ मिलकर यह बड़ी संयुक्त कार्रवाई की।
मौके पर आरोपी संचालक खाद के परिवहन या खरीदी से जुड़ा कोई बिल-बिल्टी पेश नहीं कर सका। फिलहाल सैंपल लैब भेज दिए हैं।
आरोपी कम पढ़े-लिखे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर चंद रुपयों की जैविक खाद को हजारों रुपये की रासायनिक डीएपी के दाम पर खपाने की फिराक में था।
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रवींद्र यादव ने भास्कर को बताया जब्त की गई बोरियों पर स्पष्ट रूप से डीएपी लिखा हुआ था।
इतना ही नहीं, जिस तरह असली रासायनिक डीएपी की बोरियों का रंग (कलर) होता है, इन बोरियों का रंग भी बिल्कुल वैसा ही रखा गया था।
एजुकेशन हब बना अवैध डंपिंग यार्ड, ब्रांडेड कंपनियों जैसी क्लोनिंग
इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला मामला स्पॉट और पैकेजिंग का है। मुनाफाखोरी के चक्कर में आरोपी ने खाद को किसी सामान्य गोदाम में रखने के बजाय एक कॉन्वेंट स्कूल के परिसर को अपना सेफ हाउस बनाया, ताकि किसी को शक न हो। दूसरा बड़ा खेल ब्रांड क्लोनिंग का है।
जब्त बोरियों पर सरदार ब्रांड का ऑर्गेनिक सब्सीट्यूट ऑफ डीएपी प्रिंट है, जिसे गुजरात के भरूच से लाया गया था।
इसकी पैकिंग को हूबहू असली रासायनिक डीएपी जैसा लुक दिया गया है ताकि कम पढ़े-लिखे किसानों की आंखों में धूल झोंककर इसे असली खाद के दामों पर बेचा जा सके।
