भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अरहर की किस्म ‘आशा’ का भारत का पहला पूर्ण टेलोमेयर-से-टेलोमेयर (T2T) संदर्भ जीनोम विकसित किया है। जानें इससे किसानों और कृषि क्षेत्र को क्या होंगे लाभ।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार करते हुए अरहर (Pigeonpea/तूर) की लोकप्रिय किस्म ‘आशा’ का भारत का पहला पूर्ण रूप से एनोटेटेड टेलोमेयर-से-टेलोमेयर (T2T) संदर्भ जीनोम विकसित कर लिया है।
अरहर भारत की सबसे प्रमुख दलहन फसलों में से एक है और देश की खाद्य व पोषण सुरक्षा में इसकी अहम भूमिका है।
यह बड़ी उपलब्धि नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIPB) के वैज्ञानिकों के निरंतर और अग्रणी शोध कार्यों का परिणाम है।
जीनोम की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी आंकड़े
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस नए T2T जीनोम अनुक्रम में अद्वितीय तकनीकी विशेषताएं शामिल हैं:
- बेस पेयर्स: इस जीनोम अनुक्रम में डीएनए के 752.65 मिलियन बेस पेयर्स शामिल हैं, जिन्हें 92 कॉन्टिग्स में संयोजित किया गया है।
- पूर्ण गुणसूत्र प्रतिनिधित्व: यह अरहर के सभी 11 गुणसूत्रों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें सभी 11 सेंट्रोमियर और 22 टेलोमियर शामिल हैं।
- जीन पहचान: व्यापक जीनोम एनोटेशन के जरिए 36,557 जीनों की पहचान की गई है, जिससे 48,008 एमआरएनए (कोडिंग अनुक्रम) प्राप्त हुए हैं।
- ग्लोबल डेटाबेस: NIPB_CcT2T_4 नाम से निर्दिष्ट इस जीनोम असेंबली को वैश्विक डेटाबेस (NCBI) में अभिगमन संख्या GCF_000230855.1 के तहत 20 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है।
दलहन अनुसंधान और जलवायु अनुकूल खेती में कैसे मददगार?
इस पूर्ण रूप से एनोटेटेड T2T संदर्भ जीनोम के विकसित होने से देश के कृषि और दलहन अनुसंधान को एक नया आयाम मिलेगा:
- उन्नत जीन विश्लेषण: यह वैज्ञानिकों को पैनजीनोम विश्लेषण और महत्वपूर्ण कृषि-पोषण गुणों से जुड़े जीन की खोज में मदद करेगा।
- आधुनिक तकनीक: आणविक प्रजनन और जीनोम संपादन (Genome Editing) तकनीकों के उपयोग के लिए यह एक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन बनेगा।
- क्लाइमेट रेजिलिएंट वैरायटी: इससे जलवायु अनुकूल, अधिक उपज देने वाली और कीट-प्रतिरोधी अरहर की नई किस्में विकसित करने में तीव्र गति आएगी।
‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ को मिलेगी मजबूती
भारत सरकार ने देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ‘दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन’ (2025-26 से 2030-31) की शुरुआत की है।
इस मिशन का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक देश में दलहन उत्पादन को बढ़ाकर लगभग 35 मिलियन टन तक पहुंचाना है।
ICAR की यह वैज्ञानिक उपलब्धि इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
