मक्का किसानों के लिए अलर्ट! फॉल आर्मीवर्म कीट का खतरा

मक्का फसल में फॉल आर्मीवर्म (सैन्य कीट) के संभावित प्रकोप को लेकर कृषि विभाग ने तकनीकी परामर्श जारी किया है। जानिए कीट की पहचान, नुकसान और इसके प्रभावी नियंत्रण के उपाय।

मक्का उत्पादक क्षेत्रों में अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के चलते फॉल आर्मीवर्म (सैन्य कीट) के संभावित प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग, अजमेर ने विस्तृत तकनीकी परामर्श जारी किया है।

वैज्ञानिक रूप से स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपरडा के नाम से जाना जाने वाला यह विदेशी एवं सर्वभक्षी कीट मक्का की फसल को भारी नुकसान पहुँचाता है।

इस कीट की तीव्र प्रजनन क्षमता और छोटे जीवन चक्र के कारण किसानों को समय रहते इसके प्रबंधन के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

 

फॉल आर्मीवर्म कीट की पहचान और जीवन चक्र

फॉल आर्मीवर्म एक सर्वभक्षी कीट है, जो वर्ष 2015 में पहली बार अमेरिका में देखा गया था। यह कीट खरीफ 2018 के दौरान राजस्थान के मक्का बहुल क्षेत्रों में प्रविष्ट हुआ था।

अफ्रीका में मक्का को 20 से 25 प्रतिशत तक नुकसान पहुँचाने वाला यह कीट एक ही दिन में 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है।

  • अंडे और लार्वा: मादा कीट पत्तियों पर 50 से 200 तक अंडों का गुच्छा देती है, जिनसे 3 से 4 दिनों में इल्लियाँ निकलती हैं।
  • शारीरिक विशेषता: इल्ली की तीसरी अवस्था के बाद इसके सिर पर उल्टे ‘Y’ आकार का निशान तथा 8वें बॉडी सेगमेंट पर 4 वर्गाकार बिंदु पाए जाते हैं। इसके वयस्क नर कीट के अगले पंख धूसर-भूरे रंग के होते हैं, जिन पर सफेद त्रिभुजाकार आकृति और किनारे पर सफेद धब्बे होते हैं।
  • फसल को पहुँचाने वाला नुकसान: शुरुआती अवस्था में इल्ली पत्तियों को खुरचकर सफेद निशान बनाती है। आकार बढ़ने पर यह मक्का के गोले (पोटे) में घुसकर पत्तियों को खाती है, जिससे एक कतार में गोल व लंबे छिद्र बन जाते हैं। यह कीट तना छेदक की तुलना में बड़े छिद्र बनाता है और पत्तियों पर विष्टा छोड़ता है।

 

फॉल आर्मीवर्म की रोकथाम एवं उपचार के उपाय

कृषि विभाग ने इस खतरनाक कीट के नियंत्रण के लिए निम्नलिखित त्रि-स्तरीय सुरक्षा उपाय सुझाए हैं:

यांत्रिक एवं सांस्कृतिक नियंत्रण:

  • समय पर बुवाई, अंतराशस्य फसलें, निंदाई-गुड़ाई और संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
  • शुरुआत में अंडों और लार्वा को हाथों से एकत्रित कर नष्ट करें।
  • प्रति हेक्टेयर 25 ‘T’ आकार के पक्षी मचान (बर्ड पर्चेस) 30 दिन की अवस्था तक लगाएं।
  • कीटों को आकर्षित करने के लिए 40 विशेष फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर स्थापित करें।

देशी उपचार:

  • प्रभावित पौधों के पोटे में सूखी बारीक मिट्टी या राख डालें।
  • बुवाई के 30 दिन बाद मक्का के पोटे में मिट्टी व चूने का 9:1 अनुपात में मिश्रण डालें।

जैविक नियंत्रण :

बेसिलस थुरिंजेनेसिस / एन.पी.वी. (2 ग्राम/लीटर या 1 लीटर/हेक्टेयर) अथवा जैविक फफूंद (मेटारिजियम एनीसोप्ली, मेटारिजियम राइली, न्यूमरिया राइली, ब्यूवेरिया बेसियाना, वर्टिसिलियम लेकानी) का 5 ग्राम/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

रासायनिक नियंत्रण :

यदि फसल में आर्थिक नुकसान की स्थिति दिखाई दे तो कृषि विभाग की सलाह अनुसार निम्न में से किसी एक कीटनाशी का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करें—

  • इमामेक्टिन बेंजोएट 5%
  • स्पाइनोटोरम 11.7%
  • थायोमेथोक्साम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन
  • क्लोरांट्रानिलिप्रोले 18.5% SC

नोट: किसी भी कीटनाशी का उपयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह और लेबल निर्देशों के अनुसार ही करें।

समस्या होने पर कहां करें संपर्क?

यदि मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म का अधिक प्रकोप दिखाई दे, तो किसान तुरंत अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी या सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय से संपर्क करें।

फॉल आर्मीवर्म मक्का की फसल के लिए बेहद नुकसानदायक कीट है, लेकिन समय पर पहचान और कृषि विभाग द्वारा सुझाए गए जैविक, यांत्रिक तथा रासायनिक उपाय अपनाकर इसके प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

किसानों को नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करते रहना चाहिए ताकि शुरुआती अवस्था में ही इस कीट पर नियंत्रण पाया जा सके।