बेड़िया की तीखी मिर्ची को मिला जीआई टैग, दुनिया में बढ़ेगी धाक

खरगोन की बेड़िया मिर्ची का मान बढ़ने से किसानों में खुशी की लहर,

तीन साल के प्रयासों के बाद मिली सफलता, तीखापन होने से मांग रहती है अधिक

निमाड़ अंचल के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए गुरुवार को एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है।

अपनी खास तीखापन और चटक लाल रंग के लिए देश-दुनिया में मशहूर खरगोन जिले की लाल मिर्ची को आधिकारिक रूप से जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) मिल गया है।

इस प्रतिष्ठित टैग के मिलने से अब खरगोन की मिर्ची को वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट ब्रांड के रूप में नई पहचान मिलेगी।

निमाड़ फ्रेश एग्रीकल्चर डेवलपमेंट फार्मर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने जीआई टैग के लिए आवेदन किया था और वह करीब तीन साल से इसके लिए प्रयासरत थे।

खरगोन की लाल मिर्ची की तीन प्रमुख विशेषता हैं। पहला उसकी एसएचयू वैल्यू 70 से 80 हजार होने से उसका तीखापन अच्छा है।

कॉलर वैल्यू 70 से 80 है और डंडीदार मिर्ची को किसान खेत से ही डंडी तोड़कर देते हैं। इतना ही नहीं बारिश के मौसम यानि ऑफ सीजन में मिर्ची आने से भी इसकी अधिक मांग रहती है।

 

देश की दूसरी सबसे बड़ी मिर्ची मंडी है बेड़िया

खरगोन जिले की बेड़िया मिर्ची मंडी को देश की दूसरी सबसे बड़ी मिर्ची मंडी माना जाता है।

यहां की मिर्ची अपने खास स्वाद, तीखेपन और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण पहले से ही देश के कई राज्यों सहित विदेशों में भी निर्यात की जाती रही है।

अब मिर्ची को जीआई टैग मिलने से किसानों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उचित दाम और पहचान मिलेगी।

अभी यह मिर्ची यूरोप के अलावा चीन, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, इंडोनेशिया, दुबई, श्रीलंका, टर्की, मैक्सिको आदि देशों में जाती है।

 

किसानों-निर्यातकों को सीधा फायदा

निमाड़ फ्रेश के अभिषेक पाटीदार ने बताया कि जीआई टैग मिलने से खरगोन की मिर्ची की मांग वैश्विक बाजारों में तेजी से बढ़ेगी।

इससे न केवल मिलावट पर रोक लगेगी, बल्कि निमाड़ के हजारों मिर्ची उत्पादक किसानों को उनकी फसल का सीधा और बेहतर दाम मिल सकेगा।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां की मिट्टी और जलवायु मिर्ची की इस विशेष वैरायटी के लिए वरदान है, जो इसे देश के अन्य हिस्सों की मिर्ची से अलग बनाती है।

जीआई टैग करवाने में कंसल्टेंट जीआई एक्सपर्ट पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने मुख्य भूमिका निभाई।