किसानों के लिए तैयार हुई आकस्मिक योजना
अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने 315 जिलों की पहचान कर खरीफ 2026 के लिए विशेष तैयारी शुरू की है।
जानें किसानों के लिए बीज, सिंचाई, फसल बीमा, KCC, PMFBY और वैकल्पिक फसल योजना पर क्या है सरकार का एक्शन प्लान।
देश में अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर संभावित चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीति पर चर्चा की।
केंद्र सरकार का कहना है कि वह हालात बिगड़ने का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि वैज्ञानिक आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर पहले से तैयारी कर रही है ताकि किसानों और कृषि उत्पादन पर असर को न्यूनतम रखा जा सके।
अब तक 43% कम बारिश, आगे भी कमजोर रह सकता है मानसून
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य से काफी पीछे चल रहा है और अब तक देश में औसतन लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार जुलाई के शुरुआती सप्ताह तक भी कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।
ऐसी स्थिति में वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से वैकल्पिक रणनीतियों पर काम कर रही हैं।
315 संवेदनशील जिलों की पहचान: 12 राज्यों पर विशेष नजर
कृषि मंत्रालय और ICAR ने वैज्ञानिक डेटा के आधार पर देश के 315 जिलों की पहचान की है, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा सबसे ज्यादा है।
इन्हें तीन प्राथमिकताओं में बांटा गया है:
- उच्च प्राथमिकता (111 जिले): जहां सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से कम है।
- मध्यम प्राथमिकता (76 जिले): जहां 25 से 50 प्रतिशत तक सिंचाई की व्यवस्था है।
- निम्न प्राथमिकता (128 जिले): जहां डैम और अन्य साधनों से बेहतर सिंचाई उपलब्ध है।
ये जिले मुख्य रूप से 12 राज्यों—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में फैले हैं।
DACP: संकट से निपटने के लिए ‘जिला कृषि आकस्मिकता योजना’
कमजोर मानसून से निपटने के लिए ICAR और ICAR-CRIDA ने सभी प्रभावित जिलों के लिए District Agriculture Contingency Plans (DACP) तैयार कर लिए हैं।
इसे सिर्फ फाइलों तक सीमित न रखकर “ऑपरेशनल प्लान” की तरह तुरंत जमीन पर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- वैकल्पिक फसलें: कम वर्षा की स्थिति में उगाई जा सकने वाली फसलों की सूची।
- फसल विविधीकरण (Crop Diversification): जोखिम को कम करने के लिए इंटर-क्रॉपिंग और मिश्रित खेती को बढ़ावा।
- विशेष फसलें: दलहन (दालें), मोटा अनाज (श्री अन्न), और तिलहन जैसी फसलों पर जोर, जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकती हैं।
वैज्ञानिक सलाह: कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे जल्दबाजी में थोड़ी सी बारिश देखकर बोनी न करें।
खेत में कम से कम 75 से 100 मिलीमीटर तक संचयी वर्षा और पर्याप्त नमी होने के बाद ही बुवाई करें, ताकि पुनर्बुवाई (Re-sowing) का खर्च न उठाना पड़े।
किसानों तक वैज्ञानिक सलाह: KVK और डिजिटल प्लेटफॉर्म
किसानों तक समय पर और स्पष्ट सलाह पहुँचाने में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और एग्रो‑मौसम सलाह इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे जिलों के साथ मिलकर काम करें और अल नीनो के संभावित प्रभाव व कमजोर मानसून की स्थिति में किसानों को लगातार मार्गदर्शन दें।
जानकारी पहुँचाने के लिए इन माध्यमों पर जोर दिया गया है: एग्रो‑मेट एडवाइजरी, SMS और व्हाट्सऐप मैसेज, कॉल सेंटर, रेडियो और टीवी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म।
लक्ष्य यह रखा गया है कि समय पर जानकारी और सही सलाह हर किसान तक पहुँचे, ताकि वह वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अनुसार बुवाई, फसल बदलाव और इनपुट उपयोग के निर्णय ले सके।
जल संरक्षण और इनपुट की अग्रिम व्यवस्था
सरकार ने “पानी की हर बूंद कीमती है” के सिद्धांत पर जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
- जल संचयन: मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम और बोरी बंधन को तुरंत दुरुस्त किया जाएगा।
- अतिरिक्त बीज स्टॉक: संभावित प्रभावित जिलों के लिए 1 प्रतिशत अतिरिक्त बीज रिजर्व रखा गया है।
- उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता: यूरिया, DAP, MOP, NPK और SSP का बफर स्टॉक पूरी तरह संतोषजनक है और इसकी निगरानी के लिए दिल्ली में विशेष सेल काम कर रहा है।
- पशुधन के लिए चारा: चारे की कमी वाले क्षेत्रों के लिए अग्रिम सप्लाई चेन बनाई जा रही है और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र बनाया गया है।
किसानों के लिए ‘संकट-सहारा’ बनेंगी ये 3 सरकारी योजनाएं
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि फसलों के साथ-साथ किसानों की वित्तीय सुरक्षा भी बेहद जरूरी है।
इसके लिए सरकार तीन मोर्चों पर काम कर रही है:
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): प्रभावित जिलों में बीमा का दायरा बढ़ाया जा रहा है ताकि नुकसान की स्थिति में समय पर मुआवजा मिल सके।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): जिन किसानों के पास कार्ड नहीं है, उनका कार्ड तुरंत बनाया जा रहा है ताकि उनके पास इनपुट खरीदने के लिए पर्याप्त फंड हो।
- PM-किसान सम्मान निधि: हाल ही में जारी की गई किस्त की राशि का उपयोग किसान बीज और खाद की अग्रिम व्यवस्था के लिए कर सकते हैं।
दिल्ली में ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ गठित
इस पूरी प्रक्रिया की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए दिल्ली में “अल नीनो मॉनिटरिंग सेल” और “Crop Weather Watch Group” का गठन किया गया है।
कृषि मंत्री स्वयं हर मंगलवार को परिस्थितियों की समीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, बफर स्टॉक मजबूत होने के कारण खाद्य सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है और खरीफ 2026 के लिए 176 मिलियन टन खाद्यान्न का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती संबंधी निर्णय लें।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हरसंभव तैयारी कर रही हैं ताकि अल नीनो और कमजोर मानसून के प्रभाव को कम किया जा सके।
