6 माह में तैयार होगी चिरायता की फसल, बाजार में भारी मांग

उज्जैनः रुनीजा के युवा किसान का नवाचार

सोयाबीन में लगातार घटते मुनाफे से परेशान किसान अब वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

इसी क्रम में रुनीजा के युवा किसान विश्वजीत सिंह राठौर ने दो बीघा जमीन में औषधीय पौधे चिरायता (स्वेर्टिया चिराता) की खेती कर नया प्रयोग किया है।

आयुर्वेद में बुखार, पाचन, त्वचा रोग, रक्त शुद्धिकरण और लिवर के इलाज में इस्तेमाल होने के कारण बाजार में इसकी भारी मांग है।

दो बीघा के लिए 5 किलो बीज की जरूरत होती है। फसल 6 माह में तैयार हो जाती है।

सिर्फ दो बार निंदाई और एक बार दो बोरी यूरिया लगता है, जिससे लागत काफी कम आती है।

 

उत्पादन व मंडी भाव

  • राठौर के अनुसार दो बीघा क्षेत्र से 20 से 40 क्विंटल तक भूसे का उत्पादन मिलने की संभावना है।
  • पांच किलो बीज से लगभग 50 किलो बीज तैयार हो जाता है।
  • वर्तमान में चिरायता के बीज का भाव करीब 3,000 से 7,000 रुपए प्रति किलो तथा भूसे का मूल्य 6,000 से 11,000 रुपए प्रति क्विंटल तक नीमच मंडी में मिल रहा है।
  • ऐसे में कम लागत में ज्यादा आय देने वाली फसल साबित हो सकती है।

 

विकल्प

क्षेत्र के किसान नवाचार को उत्सुकता से देख रहे हैं। चिरायता की खेती सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह सोयाबीन का विकल्प बन सकती है।