MP GI Tag List 2026: मध्य प्रदेश ने उद्यानिकी फसलों में देश का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। गुना के कुम्भराज धनिया, नूरजहाँ आम और इंदौरी जीरावन समेत 12 फसलों को एक साथ GI टैग मिला है। जानिए क्या है इनकी खासियत।
इन 12 फसलों को मिला विश्वस्तरीय जीआई टैग
मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के जिन 12 खास उत्पादों को यह वैश्विक पहचान मिली है, उनकी पूरी सूची नीचे दी गई है :
|
जिला / क्षेत्र |
फसल / उत्पाद का नाम |
मुख्य विशेषता |
|
गुना |
कुम्भराज धनिया |
अत्यधिक खुशबू, मिठास और 0.50% वाष्पशील तेल |
|
अलीराजपुर |
नूरजहाँ आम |
3 से 3.5 किलो वजनी और 1 फीट तक लंबा अनोखा आम |
|
नरसिंहपुर |
बरमान घाट के भटे (बैंगन) |
नर्मदा की बालुई मिट्टी का अनोखा और लाजवाब स्वाद |
|
नरसिंहपुर |
नरसिंहपुर का प्रसिद्ध गुड़ |
‘चीनी का कटोरा‘ कहे जाने वाले जिले का स्पेशल ऑर्गेनिक गुड़ |
|
मांडू (धार) |
खुरासानी इमली (बाओबाब) |
14वीं सदी में अफ्रीका से आया अनोखा उल्टा दिखने वाला पेड़ |
|
सिवनी |
जंबो सीताफल |
600 से 700 ग्राम वजनी बेहद मीठा शरीफा |
|
जबलपुर |
हरी मटर और सिंघाड़ा |
उच्च प्रोटीन वाली मटर और 7 महीने की मेहनत से उगा सिंघाड़ा |
|
खरगोन |
लाल मिर्च (बेदिया मंडी) |
चीन, मलेशिया और सऊदी अरब तक निर्यात होने वाली तीखी मिर्च |
|
मालवा क्षेत्र |
मालवी आलू और गराडू |
रोग प्रतिरोधक आलू और पारंपरिक मिठाइयों में बिकने वाला गराडू |
|
इंदौर, बुरहानपुर, रतलाम |
जीरावन, केला, सैलाना ककड़ी |
इंदौरी जीरावन मसाला, बुरहानपुर का केला और सैलाना की बालम ककड़ी |
जीआई टैग पाने वाले कुछ प्रमुख उत्पादों की अद्भुत खासियतें
गुना का कुम्भराज धनिया: विदेशों में भारी मांग
गुना जिले में पिछले 60 वर्षों से उगाया जा रहा यह धनिया महज 85-90 दिनों में तैयार हो जाता है। इसमें 0.4 से 0.50 प्रतिशत तक प्राकृतिक वाष्पशील तेल पाया जाता है, जो इसे बाकी धनियों से ज्यादा खुशबूदार और स्वादिष्ट बनाता है।
अकेले गुना में देश का लगभग 20 से 25 प्रतिशत (32,000 मीट्रिक टन) धनिया पैदा होता है।
खुरासानी इमली: मांडव की माटी का जादू
14वीं शताब्दी में सुल्तान महमूद खिलजी के शासनकाल में इसे अफ्रीका से मांडू लाया गया था।
इसे ‘बाओबाब’ या मांडवी इमली भी कहते हैं। इस पेड़ की बनावट ऐसी लगती है मानो किसी ने पेड़ को जड़ों समेत उल्टा गाड़ दिया हो।
नूरजहाँ आम: 3 किलो का एक इकलौता आम
अलीराजपुर के कट्टीवाड़ा का यह आम सोशल मीडिया पर अपनी विशालकाय बनावट के लिए बेहद मशहूर है।
अफगानिस्तान मूल की मानी जाने वाली इस किस्म का एक आम 3 से 3.5 किलोग्राम तक का हो सकता है।
बैतूल का गजरिया आम और खरगोन की लाल मिर्च को भी मिली पहचान
बैतूल का गजरिया आम और खरगोन की लाल मिर्च पहले से ही अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं।
GI टैग मिलने से इनके निर्यात और बाजार मूल्य में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
नरसिंहपुर का गुड़: एमपी का ‘चीनी का कटोरा’
काली कपासी मिट्टी में सहफसली खेती के जरिए उगाए जाने वाले गन्ने से यह गुड़ तैयार होता है।
मध्य प्रदेश के कुल गन्ना उत्पादन का 65% हिस्सा अकेले नरसिंहपुर से आता है। यहाँ के किसान अब गुड़ उत्पादन के जरिए बड़े उद्यमी बन रहे हैं।
इन 7 नए उत्पादों के लिए भी भेजा गया प्रस्ताव
मध्य प्रदेश सरकार यहीं नहीं रुकने वाली है। राज्य के 7 और प्रसिद्ध स्थानीय उत्पादों को जल्द ही जीआई टैग दिलाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
इनमें शामिल हैं:
- उज्जैन की प्रसिद्ध इमली और आलीराजपुर का अचारी आम।
- मालवा का सफेद प्याज और झाबुआ का पारंपरिक ‘दाल पानिया’।
- मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोक नगर की खिरनी।
विशेषज्ञों का मानना है : इन फसलों को जीआई टैग मिलने से अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मध्य प्रदेश के किसानों के उत्पादों को सही और ऊंचे दाम मिलेंगे, जिससे ब्रांड वाल्यू बढ़ेगी और माँग बढ़ने से किसानों को सीधा लाभ होगा।
