मेहनत और कौशल से खेत में ले रहे दो फसलें
मुनाफा तीन गुना
सागर जिले के भापेल गांव के प्रगतिशील युवा किसान श्यामसुंदर ठाकुर ने जैविक खेती और हाइब्रिड अमरूद की खेती को मिलाकर मिसाल पेश की है।
मात्र दो एकड़ में लगाए गए हाइब्रिड अमरूद के बगीचे से वे प्रति सीजन ढाई से तीन लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं।
इसी बगीचे में अमरूद के पेड़ों के बीच उपलब्ध स्थान का उपयोग कर वे गेहूं की फसल भी ले रहे हैं।
इसके अलावा वे दो एकड़ में पूरी तरह जैविक तरीके से आलू तथा दो एकड़ में गेहूं की खेती कर रहे हैं।
घर में पाली गई 40 गायों के गोबर से वर्मी कंपोस्ट और गोकृपा अमृतम तैयार कर वे रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुक्त खेती कर रहे हैं।
प्रतिदिन 10 से 20 किलो निकलता है अमरूद
श्यामसुंदर बताते हैं कि हाइब्रिड अमरूद के पेड़ तीन साल बाद फल देने लगे थे। अब हर साल शुरुआत में रोज 10-20 किलो अमरूद निकलते हैं, जो एक महीने में बढ़कर रोज एक क्विंटल तक पहुंच जाते हैं।
ये अमरूद सामान्य अमरूद से काफी बड़े और स्वादिष्ट होते हैं, इसलिए मंडी में बेहतर दाम मिलते हैं।
प्रति सीजन ढाई से तीन लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा हो जाता है। अमरूद के अलावा जैविक आलू और जैविक गेहूं भी उगाते हैं।
दोहरी आमदनी
किसान श्यामसुंदर ठाकुर ने बताया, उनके दादा कल्याण सिंह ने इसकी शुरुआत की थी। 11 साल में खेती को पूरी तरह बदल दिया है।
दो एकड़ जमीन में हाइब्रिड अमरूद के करीब 400 पेड़ लगाए हैं। साथ ही 70-80 नींबू के पेड़ भी हैं।
पेड़ों के बीच पांच फीट और कतारों के बीच दस फीट की जगह को खाली नहीं छोड़ते। इस जगह में वे गेहूं लेते हैं। इससे एक ही जमीन से दोहरी आमदनी हो रही है।
खेत में उपयोग नहीं करते रासायनिक खाद
युवा किसान किसी भी फसल में यूरिया, डीएपी या कोई रासायनिक कीटनाशक नहीं डालते।
खाद के लिए घर पर ही वर्मी कंपोस्ट और गोकृपा अमृतम तैयार करते हैं। घर में 40 देशी गाय पाल रखी हैं। रोजाना 80-90 किलो गोबर, गोबर गैस प्लांट में डाला जाता है।
इससे घर में खाना पकाने के लिए गैस मिलती है और बचा हुआ स्लरी खाद के रूप में, इस्तेमाल होता है।
श्यामसुंदर कहते हैं कि रासायनिक खाद से शुरुआत में उपज अच्छी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे जमीन बंजर हो जाती है।
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