भोपाल के रतुआ रतनपुर गांव के हेमंत और ओम कुशवाह ने छोटी शुरुआत को बड़ी सफलता में बदल दिया। महज 10 हजार पौधों से शुरू की गई उनकी नर्सरी आज हर महीने 15 लाख पौधों का उत्पादन कर रही है।
सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण के सहयोग से उनकी “ओम नर्सरी” अब किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।
भोपाल जिले के छोटे से गांव रतुआ रतनपुर के किसान भाई हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह आज कृषि उद्यमिता की एक प्रेरक मिसाल बन चुके हैं।
कभी महज 10 हजार पौधों से नर्सरी की शुरुआत करने वाले इन दोनों भाइयों ने अपने परिश्रम और लगन से इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
आज उनकी “ओम नर्सरी” हर महीने करीब 15 लाख पौधों का उत्पादन कर रही है। यह नर्सरी न सिर्फ किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध करा रही है, बल्कि आसपास के 15 से 20 ग्रामीणों को रोजगार भी दे रही है, जिससे क्षेत्र में आजीविका के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
सरकारी योजनाओं ने दिखाई सफलता की राह
हेमंत और ओम कुशवाह की सफलता के पीछे उनकी मेहनत के साथ-साथ मध्य प्रदेश शासन के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का भी अहम योगदान रहा है।
वर्ष 2017-18 में विभागीय अधिकारियों से जुड़ने के बाद दोनों भाइयों ने विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जहां उन्हें आधुनिक खेती, पौध उत्पादन और नर्सरी प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी मिली।
इसी ज्ञान और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपने व्यवसाय का लगातार विस्तार किया और आज वे प्रदेश के सफल कृषि उद्यमियों में अपनी पहचान बना चुके हैं।
45 लाख रुपये के ऋण से किया विस्तार
वर्ष 2024 में दोनों भाइयों ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की MIDH योजना के तहत 45 लाख रुपये का ऋण लेकर अपनी नर्सरी का विस्तार किया।
उन्होंने नर्सरी का क्षेत्रफल बढ़ाकर 2 एकड़ कर लिया और 4 हजार वर्गमीटर में दो आधुनिक पॉलीहाउस स्थापित किए।
आज उनकी नर्सरी में गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा जैसे फूलों के साथ-साथ विभिन्न सब्जियों की उन्नत पौध तैयार की जाती है।
यहां से तैयार पौधे मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान तक भेजे जा रहे हैं।
2000 वर्गफीट से शुरू हुआ सफर
हेमंत और ओम कुशवाह ने वर्ष 2018 में मात्र 2000 वर्गफीट क्षेत्र में पॉलीहाउस नर्सरी की शुरुआत की थी।
शुरुआती दौर में पानी की समस्या बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने खुद कुआं खोदकर सिंचाई की व्यवस्था मजबूत की।
आज उनकी करीब 8 एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह सिंचित है, जहां वे बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरा जैसी फसलों के हाईब्रिड पौधे तैयार कर रहे हैं।
उन्नत किस्मों के पौधों की बढ़ती मांग
“ओम नर्सरी” में सेमीनेस, फेजेंटा और अंकुर बीएनआर जैसी कंपनियों की उन्नत किस्मों के पौधे तैयार किए जाते हैं।
बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन क्षमता के कारण इन पौधों की मांग प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी तेजी से बढ़ रही है।
हेमंत कुशवाह का कहना है कि यदि किसान मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें, तो खेती आज भी एक लाभकारी व्यवसाय बन सकती है।
उन्होंने अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया।
किसानों के लिए प्रेरणा बनी ‘ओम नर्सरी’
रतुआ रतनपुर की “ओम नर्सरी” इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं का सही लाभ और सीखने की इच्छा किसानों की जिंदगी बदल सकती है।
हेमंत और ओम कुशवाह की यह सफलता कहानी आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो खेती को रोजगार और उद्यम के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं।
