जून में एमपी में 52% कम बारिश, 4 जिलों में लू, 30 में बारिश का अलर्ट

मध्य प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण जून में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।

प्रदेश के 48 जिलों में वर्षा का आंकड़ा औसत से नीचे है, जिससे खरीफ फसलों की बोवनी प्रभावित हो रही है।

मौसम विभाग ने जबलपुर समेत चार जिलों में लू और भोपाल सहित 30 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।

मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी का असर बारिश के आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है। जून के 23 दिन बीतने के बाद भी प्रदेश में अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी है।

एक जून से अब तक जहां औसतन 70.9 मिमी बारिश दर्ज होनी चाहिए थी, वहीं केवल 34.3 मिमी वर्षा हुई है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

 

यहाँ चलेगी लू और यहाँ बारिश का अलर्ट

इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 48 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग ने मंगलवार को जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया में लू चलने की चेतावनी जारी की है।

वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, इंदौर, धार, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा सहित करीब 30 जिलों में तेज हवा और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।

इसके विपरीत मालवा, ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कई जिलों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी बनी रह सकती है।

नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, रीवा और सिंगरौली समेत कई जिलों में गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।

 

खरीफ फसलों की बोवनी पर असर

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर खरीफ सीजन की तैयारियों पर पड़ रहा है। सोयाबीन समेत अन्य फसलों की बुवाई की रफ्तार धीमी बनी हुई है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश जरूरी होती है।

फिलहाल प्रदेश में केवल भोपाल ऐसा जिला है जहां चार इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। यहां सामान्य से 53 प्रतिशत अधिक, करीब 4.6 इंच पानी गिर चुका है।

 

मानसून की एंट्री में देरी बनी मुख्य वजह

मध्य प्रदेश में मानसून के पहुंचने की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय के एक सप्ताह से अधिक बीत जाने के बाद भी मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सका है।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून प्रदेश में प्रवेश कर सकता है।

आमतौर पर मानसून के सक्रिय होते ही तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी से सुधार आता है।