मानसून की देरी से बोवनी थमी, अब तक 25% हिस्से में हुई, इसमें मक्का-कपास सबसे ज्यादा

जून में 48% बारिश

सोयाबीन की बोवनी रुकी, क्योंकि भूमिगत जलस्तर कम होने से सिंचाई के संसाधन की कमी

मानसून की देरी ने खरीफ सत्र की बोवनी पर रोक लगा दी है। जिले में अब तक 25% हिस्से में ही बोवनी हो सकी है।

इसमें भी मक्का और कपास ज्यादा है, क्योंकि कम पानी और नमी में भी फसलें लंबे समय तक बच सकती है। लेकिन सोयाबीन और दूसरी फसलों की – बोवनी थम गई है। जिले में जून में सामान्य से 48% – कम बारिश हुई है।

जिले में 22 जून की स्थिति में सामान्य बारिश 80.5 मिमी होती है। लेकिन इस साल अब तक 41.78 मिमी पानी ही बरसा है।

मानसून आने में दो से तीन दिन का समय और लग सकता है। लेकिन अच्छी बारिश 26 जून के बाद ही होगी। इस बार भीषण गर्मी और हीटवेव के कारण भूमिगत जलस्तर भी तेजी से नीचे गिरा है। सिंचाई के संसाधन सीमित होने से सोयाबीन फसल की बोवनी।

काफी कम हुई है। जिले के कई हिस्सों में अब जल संकट की स्थिति है। ऐसे में बोवनी करने से बीज के खराब होने का डर है।

सामान्य से 48% कम बारिश के – कारण कृषि विभाग और वैज्ञानिकों ने भी मानसून आने के बाद ही बोवनी शुरू करने के लिए कहा है।

लंबे समय बाद मानसून के आगे बढ़ने के साथ जिले में प्री-मानसून की गतिविधियां सोमवार से तेज हुई हैं।

सुबह घने बादल छाने के साथ 8 बजे बूंदाबांदी हुई। दोपहर में तेज धूप के बाद शाम को मौसम बदला और तेज हवा के साथ 10 मिनट शहर के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई।

अगले तीन से चार दिन मौसम ऐसा ही रहने की उम्मीद है। पिछले 24 घंटे में धूलकोट तहसील में 34.3 मिमी बारिश दर्ज हुई है। बाकी सभी जगह सूखा रहा।

 

कम बारिश की संभावना, तुअर का रकबा बढ़ाने का प्रयास

इस बार मानसून के कमजोर और बारिश कम होने की संभावना है। ऐसे में कृषि विभाग तुअर के रकबे को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

कृषि उपसंचालक मनोहरसिंह देवके ने बताया कम और अनियमित बारिश की संभावना के चलते तुअर का रकबा 9500 हेक्टेयर तक बढ़ाने का प्रयास है।

इसके लिए किसानों को जानकारी देने के साथ अच्छी किस्म के बीजों के लिए सलाह दी जा रही है। तुअर कम और अनियमित बारिश में भी बेहतर उपज देती है।

इसके सूखा सहन करने की क्षमता के साथ यह किसी भी तरह की जमीन में उगाई जा सकती है। मिश्रित खेती के लिए भी यह उपयुक्त व कारगर है।

 

500 फीट तक गिरा जलस्तर, बोवनी प्रभावित

भीषण गर्मी और हीटवेव के असर से जिले के बड़े हिस्से में भूमिगत जलस्तर तेजी से नीचे आया है। ज्यादातर हिस्सों में 400 से 500 फीट तक जलस्तर गिर चुका है।

जिले में सिंचाई बारिश और भूमिगत जलस्तर स्रोतों पर निर्भर है। भूमिगत जलस्तर के गिरने और सिंचाई के संसाधन कम होने से बोवनी पर असर हुआ है। हालांकि केला, तुअर, कपास और मक्का की बोवनी तेजी से हो रही है।

सोयाबीन की बोवनी पूरी तरह से रूक गई है। प्री-मानसून की बारिश काफी कम है। औसत से कम बारिश में बोवनी करने से दोबारा बोवनी करने की नौबत आ सकती है।

ऐसे में मानसून की अच्छी बारिश और जमीन में 9 से 10 इंच तक नमी आने पर ही बोवनी जरूरी है।

 

तेज हवा-आंधी से केला फसल को नुकसान

निंबोला और आसपास के क्षेत्र में रविवार को तेज हवा-आंधी से फिर केला फसल को नुकसान हुआ है। 20 से ज्यादा किसानों की केला फसल 25 से 50% तक बर्बाद हुई है।

निंबोला, मगरूल और दूसरे हिस्से में जून की शुरुआत में आंधी-तूफान से केला फसल को नुकसान हुआ था। जिले में करीब 150 गांवों में केला फसल को नुकसान हुआ है लेकिन अब तक सर्वे का काम पूरा नहीं हुआ है।