कट्ठीवाडा में ‘नूरजहां’ आम की फसल तैयार, रिकॉर्ड 3500 रुपए में बिका सबसे भारी फल

इस सीजन में केवल 300 फलों का उत्पादन हुआ

अफगानी नस्ल के इस खास आम की सुरक्षा में तैनात रहे 10 गार्ड; मप्र समेत 4 राज्यों में भारी मांग

आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा में अपने विशाल आकार और अनोखे स्वाद के लिए विश्वप्रसिद्ध ‘नूरजहां’ आम की फसल पककर तैयार हो चुकी है।

इस सीजन में अनुकूल मौसम के कारण फल का अधिकतम वजन तीन किलोग्राम तक दर्ज किया गया है, जो रिकॉर्ड 3500 रुपये में बिका।

बता दें कि पिछले साल साढ़े तीन किलो का आम 3800 रुपए में बिका था। क्षेत्र के किसान शिवराज जादव और भारतसिंह जादव के बगीचों में इस बार केवल 300 फलों का सीमित उत्पादन हुआ है।

आकार में बेजोड़ होने के कारण इस आम को खरीदने के लिए मप्र के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के शौकीनों ने एडवांस बुकिंग कराई थी।

बगीचे के मालिकों ने फसल की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से 10 गार्ड तैनात किए थे। मूल रूप से अफगानी नस्ल के इस आम की कलम को वर्ष 1965 में गुजरात से लाकर कट्ठीवाड़ा की विशेष आबोहवा और मिट्टी में कड़े परिश्रम से तैयार किया गया है।

 

सीमित उत्पादन और सुरक्षा का कड़ा पहरा

किसान शिवराज जादव और भारतसिंह जादव के पास नूरजहां प्रजाति के कुल 12 पेड़ हैं। भारतसिंह के 2500 पेड़ों वाले बड़े बगीचे में नूरजहां के 9 पेड़ शामिल हैं। इस साल डेढ़ किलो से लेकर तीन किलोग्राम तक के फल आए हैं।

छोटे फलों की कीमत 1000 से 1500 रुपये के बीच रही। इन बेशकीमती आमों की सुरक्षा और देखरेख के लिए लाठीधारी गार्ड तैनात करने पड़े।

 

अफगानिस्तान से कहीवाड़ा तक का सफर

नूरजहां आम का इतिहास बेहद दिलचस्प है। यह प्रजाति मूल रूप से अफगान क्षेत्र की है।

किसान भारतराजसिंह जादव के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव वर्ष 1965 के आसपास गुजरात से इस आम की कलम लेकर आए थे।

उन्होंने कट्ठीवाड़ा स्थित अपने फार्म में इसे रोपा और वर्षों की कड़ी मेहनत से संरक्षित किया। यह पौधा आज पूरे आलीराजपुर जिले की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है।

 

जलवायु और मिट्टी का विशेष प्रभाव

भले ही इस आम का मूल कनेक्शन अफगानिस्तान से रहा हो और कलम गुजरात से आई हो, लेकिन कट्ठीवाड़ा की विशेष जलवायु और मिट्टी इसके लिए सबसे अनुकूल साबित हुई।

इसी खास आबोहवा के कारण यह फल अपने उस विशालकाय आकार में ढल सका, जिसके लिए यह आज दुनिया भर में जाना जाता है।

इस आम को इसके अनोखेपन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।