आज प्रदेशभर की कृषि उपज मंडियों में हड़ताल
मंडी टैक्स 1.70% करने का विरोध
मध्य प्रदेश में मंडी टैक्स 1.20% से बढ़ाकर 1.70% किए जाने के विरोध में प्रदेशभर की मंडियां बंद हैं।
जानिए किसानों, व्यापारियों और बाजार पर इसका क्या असर पड़ेगा। मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडी टैक्स बढ़ाने के फैसले को लेकर विवाद गहरा गया है।
राज्य सरकार द्वारा मार्केट टैक्स की दर 1.20 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.70 प्रतिशत किए जाने के बाद व्यापारी संगठनों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है।
इसके विरोध में सोमवार को प्रदेशभर की कृषि उपज मंडियों में हड़ताल का ऐलान किया गया है, जिससे खरीद-बिक्री और फसलों की नीलामी प्रभावित होने की संभावना है।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहे कृषि व्यापार पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालना उचित नहीं है।
उनका आरोप है कि इसका सीधा असर किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इसी वजह से कई मंडियों में कारोबार पूरी तरह ठप रहने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों नाराज हैं व्यापारी?
व्यापारी संगठनों का कहना है कि मध्य प्रदेश में मंडी टैक्स पहले से ही कई राज्यों की तुलना में अधिक है। ऐसे में नई बढ़ोतरी से राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है।
उनका दावा है कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में मंडी शुल्क अपेक्षाकृत कम है, जिससे वहां व्यापार करना ज्यादा लाभकारी साबित होता है।
यदि मध्य प्रदेश में टैक्स का बोझ लगातार बढ़ता रहा तो बड़ी प्रोसेसिंग कंपनियां और खरीदार दूसरे राज्यों का रुख कर सकते हैं।
किन फसलों पर पड़ सकता है असर?
बढ़े हुए मंडी टैक्स का असर कई प्रमुख कृषि उत्पादों के व्यापार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
| प्रमुख फसलें | संभावित असर |
|---|---|
| गेहूं | खरीद लागत बढ़ सकती है |
| सोयाबीन | व्यापार प्रभावित होने की आशंका |
| चना | कीमतों पर दबाव संभव |
| मसूर | कारोबार की गति धीमी पड़ सकती है |
| तिलहन | बड़े खरीदार दूसरे राज्यों का रुख कर सकते हैं |
