सूखे और जलवायु परिवर्तन के बीच 37% तक बढ़ेगी फसलों की पैदावार
ICAR-IIOR हैदराबाद ने एक अभिनव बायोपोलीमर-आधारित स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक (Smart Seed Coating Technology) विकसित की है।
यह तकनीक सूखे और जलवायु परिवर्तन के खतरों से बीजों की रक्षा कर फसल की पैदावार को 12 से 37 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।
बदलते मौसम, अनियमित बारिश और लगातार बढ़ते सूखे के बीच भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है, जो देश के करोड़ों किसानों की किस्मत बदल सकती है।
हैदराबाद स्थित आईसीएआर-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR) ने एक अभिनव बायोपोलीमर-आधारित स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक (स्मार्ट बीज उपचार) विकसित की है।
यह पेटेंटेड तकनीक फसलों को न सिर्फ जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाएगी, बल्कि खेतों में बीज डालते ही उसकी गुणवत्ता और पौधों की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।
क्या है यह ‘स्मार्ट सीड कोटिंग’ तकनीक?
पारंपरिक बीज उपचारों के विपरीत, जहाँ बीजों पर केवल कीटनाशक या फफूंदनाशी की परत चढ़ाई जाती है, यह एक बहुक्रियाशील (Multifunctional) सुरक्षात्मक कवच है।
- बायो-पॉलिमरिक परत: बीजों के चारों ओर पर्यावरण के अनुकूल और पूरी तरह से नष्ट होने वाली (Biodegradable) परत बनाई जाती है।
- पोषण का वन-स्टॉप सॉल्यूशन: यह परत अपने भीतर लाभकारी सूक्ष्मजीवों (Microorganisms), ज़रूरी पोषक तत्वों, सूक्ष्म पोषक तत्वों और पौधों की वृद्धि बढ़ाने वाले यौगिकों को समेटे रखती है।
- सीधा असर: बीज जैसे ही मिट्टी के संपर्क में आता है, यह तकनीक उसे शुरुआती नाजुक दौर में ही तेजी से अंकुरित होने, जड़ों को गहराई तक फैलाने और तनाव झेलने की ताकत देती है।
खेतों में दिखे नतीजे : पैदावार में 12% से 37% तक की भारी वृद्धि
किसानों के खेतों में किए गए क्षेत्रीय प्रदर्शनों से फसल की स्थापना, पौधों की मजबूती और उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
तेलंगाना में मूंगफली और सोयाबीन पर किए गए प्रदर्शनों में पारंपरिक कृषि पद्धतियों की तुलना में उपज में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो इस तकनीक की सफलता को बताती है।
सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर पर किए गए बहु-स्थानिक एआईसीआरपी-बीज परीक्षणों में अंकुरण की मजबूती, फसल की स्थापना और उपज में लगातार सुधार देखा गया,
जिसमें अनुपचारित नियंत्रणों की तुलना में उत्पादकता में 12-37 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो विभिन्न फसल प्रणालियों के लिए एक स्केलेबल स्मार्ट सीड तकनीक के रूप में बायोपोलीमर-आधारित बहुस्तरीय बीज उपचारों की क्षमता को दर्शाता है।
वर्षा आधारित और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए ‘वरदान’
भारत का एक बहुत बड़ा कृषि योग्य हिस्सा आज भी पूरी तरह से वर्षा (मानसून) पर आधारित है।
मानसून में देरी, अचानक सूखा पड़ना या मिट्टी में नमी की कमी के कारण अक्सर बीज अंकुरित होने से पहले ही खराब हो जाते हैं।
ICAR–IIOR की यह स्मार्ट तकनीक विकास के शुरुआती और नाजुक समय में अंकुरित हो रहे पौधों की रक्षा करती है, जिससे किसानों का फसल बर्बाद होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि इसे अनाज, बाजरा, दालें, तिलहन, सब्जियां और मसालों सहित सभी प्रकार की कृषि प्रणालियों के लिए कस्टमाइज किया जा सकता है।
देश भर में बड़े पैमाने पर पहुंचाने की तैयारी
इस नवाचार को भारत के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए ICAR–IIOR अब सार्वजनिक और निजी बीज प्रणालियों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा दे रहा है।
आने वाले समय में राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज विकास निगम, किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और निजी बीज कंपनियाँ इस तकनीक को अपने वितरण नेटवर्क में शामिल करेंगी।
भविष्य की अगली पीढ़ी की इस तकनीक को अपनाकर न केवल भारत की बीज प्रणाली सुदृढ़ होगी, बल्कि देश के लाखों किसानों की आजीविका और भारत की खाद्य सुरक्षा को एक नया संबल मिलेगा।
