खरसौद खुर्द के किसान ने 35-40 डिग्री तापमान में 450 सेब पौधों का सफल बगीचा किया तैयार
जहां आमतौर पर सेब की खेती ठंडे प्रदेशों तक सीमित मानी जाती है, वहीं मालवा के खरसौद खुर्द के युवा किसान अनिल पाटीदार ने इस धारणा को बदल दिया है।
नवाचार और नई तकनीक अपनाने की सोच के साथ उन्होंने गर्म जलवायु में सेब की खेती कर सफलता हासिल की है।
अनिल पाटीदार के मन में वर्ष 2024 में खेती में कुछ नया करने का विचार आया। उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से सेब की खेती के बारे में जानकारी जुटाई और इसके बाद हिमाचल प्रदेश जाकर बगीचों का निरीक्षण किया तथा खेती की तकनीक को करीब से समझा।
जानकारी और प्रयोग के आधार पर उन्होंने अपने खेत में सेब का बगीचा तैयार किया, जो अब क्षेत्र के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
सात किस्मों के पौधों से शुरू किया प्रयोग
किसान अनिल पाटीदार ने बताया कि उन्होंने कई बार हिमाचल प्रदेश और विभिन्न बड़ी नर्सरियों का दौरा कर जानकारी जुटाई।
इसके बाद अन्ना, वांगू सहित सात अलग-अलग किस्मों के सेब के पौधे लगाए। इनमें वांगू किस्म के 10 पौधे विशेष रूप से केन्या से मंगवाए गए।
सभी किस्मों ने स्थानीय जलवायु में अच्छा प्रदर्शन किया और पौधों पर फल आने लगे।
450 पौधे बेड पद्धति से लगाए
दिसंबर 2024 में करीब 450 पौधे बेड पद्धति से लगाए गए। पौधे से पौधे की दूरी 6 फीट और लाइन से लाइन की दूरी 10 फीट रखी गई।
रोपाई से पहले देशी गोबर खाद का उपयोग किया गया। सिंचाई और पोषण के लिए ड्रिप सिस्टम अपनाया गया तथा पौधों को स्थानीय जलवायु के अनुसार तैयार किया गया।
शुरुआती लागत 1.80 लाख रुपए
अनिल ने बताया कि विभिन्न स्थानों से मंगाए गए 440 पौधों पर करीब 370 रुपए प्रति पौधा खर्च हुआ, जिससे कुल लागत 1.60 लाख रुपए से अधिक आई।
वहीं, केन्या से मंगाए गए वांगू किस्म के पौधों की कीमत करीब 1800 रुपए प्रति पौधा रही। इनमें से 10 में से 7 पौधे सफलतापूर्वक विकसित हुए। कुल मिलाकर शुरुआती निवेश लगभग 1.80 लाख रुपए रहा।
गर्मी में भी बेहतर उत्पादन
35 से 40 डिग्री तापमान में भी पौधों ने अच्छी वृद्धि दिखाई। रोपाई के एक वर्ष बाद ही पौधों में फ्लावरिंग शुरू हो गई और फल लगने लगे। इस बार बंपर उत्पादन मिला।
प्रत्येक पौधे से लगभग 8 से 10 किलो सेब प्राप्त हुए, जिन्हें 250 रुपए प्रति किलो के भाव से मंडी में बेचा गया। सेब का आकार और स्वाद भी बेहतर रहा।
बगीचा बना आकर्षण का केंद्र, अब तैयार करेंगे नर्सरी
पाटीदार बताते हैं कि प्रतिदिन 10 से 15 लोग बगीचा देखने आते हैं। वे सभी को खेती की तकनीक और अनुभव साझा कर रहे हैं।
किसानों के लिए सेब के पौधों की नर्सरी तैयार करने की योजना है, ताकि किसानों को पौधों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े और स्थानीय जलवायु के अनुसार उपयुक्त किस्मों के पौधे उपलब्ध कराए जा सकें।
