दाना भरने के दौर में सोयाबीन पर दोहरा संकट; कीट-रोग के साथ नमी का असर

किसानों को चिंता : 75-80 दिन की फसल में फली छेदक, इल्ली-मोजेक का खतरा

जिले में सोयाबीन की फसल अब = 75 से 80 दिन की हो चुकी है। कई खेतों में फलियों में दाना भरने की – प्रक्रिया शुरू हो गई है।

फसल की इस निर्णायक अवस्था में किसानों के सामने कीट-रोग के साथ नमी की = दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। फली छेदक, चने की इल्ली, तंबाकू की इल्ली और सेमीलूपर जैसे कीटों का = खतरा बना हुआ है।

वहीं – राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट, फंगस और पीला मोजेक जैसे रोग भी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एसएस चौहान ने बताया कि इस अवस्था – में खेतों की लगातार निग्रानी जरूरी है।

फलियों में दाना भरने के दौरान कीटों का प्रकोप बढ़ा तो इसका – सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

खासकर फली छेदक और विभिन्न प्रकार की इल्लियां फलियों को नुकसान पहुंचाकर तैयार हो रही उपज को प्रभावित कर सकती हैं।

 

पत्तियों पर रोग के लक्षण दिखे तो परेशानी बढ़ेगी…

फसल में फंगस का प्रकोप होने पर पत्तियों की निचली सतह पर काली शिराएं दिखाई दे सकती हैं।

पीला मोजेक या सोयाबीन मोजेक की स्थिति में पौधे प्रभावित होते हैं। इनके वाहक, सफेद मक्खी और एफिड, भी फसल के लिए खतरा हैं।

रोगग्रस्त पौधों को समय पर खेत से नहीं हटाया गया तो संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका रहती है।

 

बारिश की बेंच ने और बढ़ाई नमी की चिंता…

इस समय कीट-रोग के साथ बारिश में खेंच होने पर नमी की कमी भी बड़ी समस्या बन रही है।

फलियों में दाना भरने के दौरान पर्याप्त नमी नहीं मिलने से दाने का विकास प्रभावित हो सकता है। उपज घटने का खतरा बना रहता है।

 

गतवर्ष की तुलना में इस साल 12.6 इंच कम बारिश

जिले में सामान्य औसत 33 इंच के मुकाबले अब तक 16.3 इंच बारिश हुई है। वहीं गतवर्ष इसी अवधि तक 28.9 इंच बारिश हो चुकी थी।