डीएपी का संकट गहराया, महंगे खाद-बीज से किसान परेशान

डीजल व रसायन की कीमतें बढ़ा रहीं किसानों की चिंता

खरीफ सीजन की शुरूआत से पहले ही किसान खाद, बीज और रासायनिक दवाओं की बढ़ी कीमतों से परेशान हैं।

पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल खेती का बजट गड़बड़ा गया है, क्योंकि सोयाबीन बीज 9,000 से 18,000 रुपए प्रति क्विटल तक बिक रहा है।

प्रमुख डीएपी खाद सहकारी समितियों से अनुपलब्ध है, जबकि विकल्प एनपीके खाद के दाम अंचल में सोयाबीन और मक्का की बुवाई की तैयारियां जारी हैं, पर अधिकांश किसानों को समय पर डीएपी नहीं मिल पा रहा।

 

कितना हुआ खाद का भाव…?

समितियों में खाद की अनुपलब्धता से किसान बाजार के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। डीएपी जहां 1350 रुपए प्रति बोरी में मिलता है, वहीं एनपीके 2450 रुपए प्रति बोरी तक पहुंच गया है।

बुवाई के शुरूआती दौर में डीएपी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है, जिसके अभाव में फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

किसानों का कहना है कि सरकार के दावों के बावजूद सीजन शुरू होते ही डीएपी नहीं मिलना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

लुन्हेरा बुजुर्ग समिति प्रबंधक नरेंद्र सोलंकी ने बताया कि एनपी और यूरिया उपलब्ध है।

किसान रामसिंह, दसरथ, राधेश्याम, रूप सिह का कहना है कि मानसून में देरी और बढ़ती लागत से खेती का गणित बिगड़ गया है।

ई-टोकन व पंजीकरण व्यवस्था की जटिलता से किसान कागजी कार्रवाई में उलझे है।