बुरहानपुर के युवा किसान ने शुरू किया आधुनिक कृषि यंत्र केंद्र

कस्टम हायरिंग योजना: किसानों को बना रहे हैं सशक्त

निजी कस्टम हायरिंग योजना से बुरहानपुर के युवा प्रतीक पाटील बने आत्मनिर्भर। जानें कैसे 10 लाख तक की सब्सिडी के साथ उन्होंने शुरू किया अपना कृषि सेवा केंद्र।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये लगातार प्रयास कर रही है।

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर न केवल उत्पादन में वृद्धि हो रही है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

इसी का एक प्रेरक उदाहरण बुरहानपुर जिले के ग्राम टिटगांवकलां के युवा प्रतीक पाटील हैं, जिन्होंने सरकारी योजना का लाभ लेकर न केवल खुद का स्वरोजगार शुरू किया, बल्कि आसपास के किसानों की बड़ी समस्या का समाधान भी किया।

 

खेती की चुनौतियों को बनाया अवसर

एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रतीक अपने पिता के साथ वर्षों से केला, गन्ना, सोयाबीन और गेहूँ जैसी फसलें उगा रहे थे।

खेती के दौरान उन्होंने महसूस किया कि गाँवों में समय पर ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों का न मिलना एक बड़ी समस्या है।

मशीनों की कमी के कारण बुवाई और कटाई में देरी होती थी, जिसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ता था।

इसी समस्या को समाधान में बदलने के लिए प्रतीक ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग की ‘निजी कस्टम हायरिंग योजना’ का सहारा लिया।

 

कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए अनुदान पर मिले आधुनिक कृषि यंत्र

किसान प्रतीक ने सहायक कृषि यंत्री कार्यालय, बुरहानपुर से योजना की जानकारी ली और ऑनलाइन आवेदन किया। पारदर्शी कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से उनका चयन हुआ।

 

‘गुरूकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र’ की स्थापना

योजना के तहत प्रतीक को लगभग 20.5 लाख रुपये की परियोजना पर ऋण स्वीकृत हुआ। अक्टूबर 2025 में उन्होंने ‘‘गुरूकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र’’ की शुरुआत की।

आज उनके पास ट्रैक्टर के साथ-साथ आधुनिक यंत्र जैसे:

  • कल्टीवेटर और रोटावेटर
  • मल्चिंग मशीन
  • मल्टीक्रॉप थ्रेशर
  • चॉफ़ कटर
  • सीड कम फर्टिलाईजर ड्रिल

आदि उपलब्ध है। इन यंत्रों के माध्यम से वे अपने गाँव और आसपास के लगभग 40 किसानों को सेवाएँ दे रहे हैं। प्रतीक बताते हैं कि महज दो महीनों में उन्होंने 2.6 लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया है।

इन यंत्रों के माध्यम से वे अपने गाँव और आसपास के लगभग 40 किसानों को सेवाएँ दे रहे हैं। प्रतीक बताते हैं कि महज दो महीनों में उन्होंने 2.6 लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया है।

 

क्या है कस्टम हायरिंग योजना?

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2012-13 से संचालित यह योजना ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी बनाने का एक बेहतरीन माध्यम है।

योजना की मुख्य विशेषताएँ:

विवरण

जानकारी

उद्देश्य

छोटे किसानों को किराये पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना और युवाओं को रोजगार देना।

अधिकतम लागत

परियोजना की अधिकतम लागत 25 लाख रुपये तक हो सकती है।

अनुदान (Subsidy)

कुल लागत का 40% (अधिकतम 10 लाख रुपये) तक का अनुदान देय है।

चयन प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन के बाद कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से चयन।

 

आवेदन के लिए पात्रता और दस्तावेज:
  • आयु: 18 से 40 वर्ष।
  • शैक्षणिक योग्यता: न्यूनतम 12वीं पास।
  • दस्तावेज: आधार कार्ड, बी-1 (जमीन के कागजात), मूल निवासी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (आरक्षित वर्ग हेतु)।
  • धरोहर राशि: 10,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (DD)।

प्रतीक पाटील जैसी सफलता की कहानियाँ यह सिद्ध करती हैं कि यदि युवा सरकार की योजनाओं का सही लाभ उठाएं, तो खेती केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि एक लाभप्रद व्यवसाय बन सकती है।