एक जिला-एक उत्पाद में शामिल है केला फसल
सालाना 18. 28 लाख मीट्रिक टन होता है उत्पादन, जिले की अर्थव्यवस्था में खास स्थान
बुरहानपुर. निमाड़ की उपजाऊ धरती पर उगने वाले बुरहानपुर के प्रसिद्ध केले को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्राप्त होने से जिले ने कृषि क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल कर ली।
जीआई टैग मिलने से बुरहानपुर का केला अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।
यह सम्मान यहां के किसानों की वर्षों की मेहनत के प्रयासों और प्रशासन की सक्रिय पहल का परिणाम माना जा रहा है। जिले में वर्ष 1960 के आसपास केले की खेती ने बड़े स्तर पर आकार लेना शुरू किया था।
यह फसल अब जिले की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। वर्तमान में जिले के लगभग 18,640 किसान केले की खेती से जुड़े हैं।
करीब 26,120 हेक्टेयर क्षेत्र में होने वाली इस खेती से प्रतिवर्ष लगभग 18.28 लाख मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है।
बता दें कि बुरहानुपर की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां उत्पादित केला अपने विशिष्ट स्वाद, सुगंध, बड़े आकार, अच्छी शेल्फ लाइफ, आकर्षक आकार के लिए जाना जाता है। यहां मुख्य रूप से जी-9, बसराई और अन्य किस्में उगाई जाती हैं।
विदेश तक होता है निर्यात
बुरहानपुरा का केला देश ही नहीं इराक, ईरान, दुबई यूएई, तुर्की, नेपाल व मध्य एशियाई देशों तक निर्याता हो रहा है।
हाल के वर्षों में लगभग 70 हजार मीट्रिक टन केले का निर्यात दर्ज किया गया।
किसानों को मिलेगी बेहतर कीमत
टैग वाले उत्पाद प्रीमियम श्रेणी में आते हैं। खरीदार और निर्यातक अधिक कीमत देने को तैयार रहते हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ सकती है।
निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी
बाजारों में टैग गुणवत्ता और प्रामाणिकता का संकेत माना जाता है। इससे बुरहानपुर केले की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में और बढ़ेगी।
अब ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी
जीआई टैग मिलने से बुरहानपुर केले की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और नकली उत्पादों पर रोक लगेगी।
साथ ही निर्यात के नए द्वार खुलेंगे, कृषि आधारित उद्योगों को गति मिलेगी व स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेगे।
एक जिला. एक उत्पाद योजना में शामिल बुरहानपुर का केला अब जिले की पहचान को विश्व पटल पर और अधिक सशक्त बनाएगा।
केले उत्पाद ने बढ़ाया कृषि उद्योग
केले के उत्पादन के चलते प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत जिले में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है।
इन इकाइयों में केले से विभिन्न प्रकार के मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की मांग में भी वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय उद्योगों को नई गति मिलेगी।
मप्र के प्रमुख जीआई टैग उत्पाद
- कड़कनाथ चिकन
- रतलामी सेव
- सरबती गेहूं
- बुरहानपुर का केला
बड़ी उपलब्धि
बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिल गया है। इससे यहां के केले की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी। यहां के किसानों के लिए ये बहुत बड़ी उपलब्धि है।
हर्षसिंह, कलेक्टर बुरहानपुर
