कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (SMAM) योजना के तहत छोटे, सीमांत और महिला किसानों को कृषि उपकरणों और किसान ड्रोन पर 40% से 100% तक की सब्सिडी मिल रही है।
जानिए पूरी योजना, लाभ और आवेदन की जानकारी।
SMAM योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और वित्तीय सहायता
इस योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत रूप से मशीन खरीदने और सामूहिक रूप से बैंक स्थापित करने पर अलग-अलग वित्तीय सहायता दी जाती है:
1. कृषि उपकरणों की खरीद पर सब्सिडी (DBT के माध्यम से)
- सामान्य श्रेणी के किसान: कृषि मशीन की कुल लागत का 40% अनुदान।
- SC, ST, छोटे-सीमांत किसान और पूर्वोत्तर राज्य: कुल लागत का 50% तक वित्तीय सहायता।
- किराए की सेवाओं के लिए: छोटे और सीमांत किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर या FPO के माध्यम से ड्रोन सहित मशीनीकृत सेवाओं के उपयोग के लिए 2,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता।
2. फार्म मशीनरी बैंक (FMB) और कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC)
यदि कोई स्वयं सहायता समूह (SHG), FPO या ग्रामीण उद्यमी मशीनों का बैंक खोलना चाहता है, तो सरकार बंपर सब्सिडी देती है:
- कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC): 250 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर 40% वित्तीय सहायता।
- फार्म मशीनरी बैंक (FMB): 30 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर 80% की भारी सब्सिडी।
3. पूर्वोत्तर क्षेत्रों (NER) के लिए विशेष छूट
पूर्वोत्तर राज्यों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वहाँ कृषि मशीनीकरण के लिए विशेष प्रावधान हैं:
- छोटी कृषि मशीनों पर 100% तक की सब्सिडी।
- फार्म मशीनरी बैंक (FMB) की स्थापना के लिए 95% तक की वित्तीय सहायता।
‘किसान ड्रोन’ के लिए मिल रही है 100% तक की सहायता
खेती में ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार इस योजना के तहत भारी निवेश कर रही है:
- कृषि संस्थान (ICAR, KVK, राज्य कृषि विश्वविद्यालय): ड्रोन खरीदने और उनके प्रदर्शन के लिए प्रति ड्रोन 10 लाख रुपये तक की 100% वित्तीय सहायता।
- किसान उत्पादक संगठन (FPOs): ड्रोन की खरीद पर 75% तक का अनुदान।
- ड्रोन एजेंसी (सर्विस मॉडल): ड्रोन का उपयोग करने वाली एजेंसियों को 6,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक का आकस्मिक खर्च।
महिला किसानों की भागीदारी पर विशेष जोर
यह योजना पूरी तरह समावेशी है। SMAM के तहत कुल आवंटित निधि का 30 प्रतिशत हिस्सा महिला किसानों के लिए निर्धारित किया गया है।
इसका उद्देश्य कृषि के आधुनिकीकरण में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ाना है।
कृषि मशीनीकरण से किसानों को क्या लाभ हो रहे हैं?
- श्रम और लागत में कमी: मानव और पशु श्रम पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटती है।
- समय की बचत और सटीकता: बुआई, सिंचाई, कटाई और फसल संरक्षण के कार्य समय पर और अत्यधिक सटीकता के साथ होते हैं।
- फसलोपरांत प्रबंधन: फसल कटाई के बाद प्रसंस्करण (Processing), भंडारण (Storage) और अवशेष प्रबंधन के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार होता है।
- आय में वृद्धि: लागत घटने और उत्पादन की गुणवत्ता सुधरने से किसानों की शुद्ध आय में बड़ा इजाफा हो रहा है।
SMAM योजना का प्रभाव
कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन ने देश में आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मशीनों पर सब्सिडी, कस्टम हायरिंग सेंटर, फार्म मशीनरी बैंक और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम हो रही है, समय की बचत हो रही है और किसानों की उत्पादकता बढ़ रही है।
विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों, महिला किसानों तथा कम मशीनीकरण वाले क्षेत्रों के लिए यह योजना खेती को अधिक लाभकारी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।
