MP : 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की केंद्र से मांगी अनुमति

6 मार्च को दिल्ली में बैठक, तय होगा मप्र में गेहूं खरीदी कोटा

राज्य सरकार रबी सीजन में 80 लाख टन गेहूं की खरीदी का प्लान कर रही है। इस बार इस खरीदी के लिए अग्रिम राशि केंद्र से मांगी गई है, ताकि बकाया को लेकर आगे दिक्कत न हों।

इसकी वजह मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा रबी में हुई गेहूं की खरीदी के 2894 करोड़ रुपए और खरीफ धान खरीदी के 2024 के 3482.78 करोड़ रुपए का पुनर्भुगतान की समय सीमा 30 सितंबर 2025 नियत की गई है।

आरबीआई से इसके पुनर्भुगतान की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है, परंतु सहमति नहीं मिली है। इसलिए 4217 करोड़ रुपए का भुगतान तत्काल करवाने का कष्ट करें, ताकि साख का निर्धारण हो सके और राज्य सरकार बैंक से लोन का निर्धारण कर खरीदी के लिए बैंकों से लोन लिया जा सके।

प्रदेश में गेहूं और धान की खरीदी के लिए दो एजेंसी तय है इसमें खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड। यह राशि मार्कफेड से संबंधित थी जिसके लिए पत्र लिखा गया था इसके बाद कैबिनेट से 1 हजार करोड़ रुपए और केंद्र से राशि मिलने के बाद राशि जमा कर दी है।

 

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपए प्रति क्विंटल

एमपी में गेहूं खरीदी के लिए इस बार कुल 3186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं।

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। यह पिछले साल से 160 रूपए अधिक है।

 

पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था

पंजीयन का काम 7 मार्च तक जारी रहेगा।

ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।

तहसील कार्यालयों के सुविधा केंद्रों और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंदों पर भी निशुल्क पंजीयन किए जा रहे हैं।

  • इधर एमपी ऑनलाइन कियोस्क,
  • कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क,
  • लोक सेवा केंद्रों और
  • निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफों पर पंजीयन का शुल्क देना होगा।