जबलपुर के कई क्षेत्रों में मटर में रोग के लक्षण
जबलपुर जिले के मझौली, सिहोरा और बरगी क्षेत्रों में मटर की फसल पर पाउडरी मिल्ड्यू रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
मौसम में उतार-चढ़ाव और नमी के चलते यह रोग सामने आया है। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) को मामले मिलने के बाद वैज्ञानिकों की टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक अवस्था में में होने से समय पर नियंत्रण कर नुकसान की भरपाई संभव है।
किसान परेशान
शहपुरा के किसान रमेश पटेल ने बताया कि आठ एकड़ में बोई गई मटर की फसल अच्छी स्थिति में थी, लेकिन अचानक पत्तियों पर सफेद पाउडर दिखने लगा।
मझौली क्षेत्र के किसान संतोष तिवारी ने बताया कि पांच एकड़ में बोई फसल में सुबह-शाम की नमी के कारण रोग के लक्षण नजर आए।
यह है समाधान
जैविक नियंत्रण के लिए नीम तेल 3 से 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। ट्राइकोडर्मा आधारित जैव-कवकनाशी का उपयोग करें।
रासायनिक नियंत्रण के तहत घुलनशील सल्फर 2 से 3 ग्राम/लीटर पानी में या हेक्साकोनाजोल या डाइनोकेप 1 मिलीलीटर/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
आवश्यकता अनुसार 10 से 12 दिन के अंतराल पर छिड़काव दोहराने से रोग पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद गुप्ता के अनुसार किसानों को रोग-प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए। संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें।
अधिक नाइट्रोजन से बचें। खेत में पौधों के बीच उचित दूरी रखें। संक्रमित पौधों को तुरंत नष्ट करें।
फंगस से फैलता है
वैज्ञानिकों के अनुसार ठंडी और शुष्क जलवायु, 18 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान तथा खेतों में ज्यादा नमी के कारण पाउडरी मिल्ड्यू रोग तेजी से फैलता है।
यह एरीसाइफी पॉलीगोनी नामक कवक से होता है। पत्तियों, तनों और फलियों पर सफेद चूर्ण जैसा पाउडर जमने लगता है।
पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है। प्रारंभ में निचली पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखते हैं, जो पूरे पौधे में फैल जाते हैं।
