कृषक कल्याण वर्ष
मध्य प्रदेश सरकार ने 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया। जिसके अंतर्गत गांव-गांव कृषि रथ और ग्राम सभाओं के जरिए किसानों को उन्नत खेती, नरवाई प्रबंधन और फसल विविधिकरण की जानकारी दी जा रही है।
मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। इसके तहत किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
गांव-गांव आयोजित हो रही कृषक ग्राम सभाओं में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी व वैज्ञानिक किसानों को आधुनिक और उन्नत खेती की जानकारी दे रहे हैं।
इसी क्रम में शिवपुरी जिले के पिपरसमां, ठेह, टोंगरा, सोहारा, महेदावली और कुशियारा गांवों में कृषक सभाएं आयोजित की गईं, जहां किसानों को नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
नरवाई प्रबंधन और स्ट्रॉ रीपर तकनीक पर जोर
कृषक सभाओं में किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन की उन्नत तकनीकों से अवगत कराया गया।
कृषि वैज्ञानिकों ने स्ट्रा रीपर कृषि यंत्र के माध्यम से गेहूं कटाई के बाद बची नरवाई से भूसा तैयार करने की विधि समझाई। इससे जहां पराली जलाने की समस्या कम होगी, वहीं पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
मूंग के बदले उड़द लगाने की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर उड़द और मूंगफली जैसी फसलों के उत्पादन की सलाह दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन फसलों से बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
संयुक्त दल द्वारा किसानों की फसलों का निरीक्षण कर उन्हें हरे चारे के उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई।
गांव-गांव पहुंच रहा कृषि रथ
‘कृषक कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत कृषि रथ गांव-गांव भ्रमण कर किसानों को जागरूक कर रहा है।
इसके माध्यम से किसानों को फसल लागत कम करने, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और शासन की योजनाओं का लाभ उठाने के बारे में जानकारी दी जा रही है।
चौपालों के जरिए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ई-टोकन से उर्वरक वितरण और मृदा स्वास्थ्य पर फोकस
कृषि रथ के माध्यम से किसानों को निम्न विषयों पर जानकारी दी जा रही है:
- ई-विकास प्रणाली के तहत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था,
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड,
- एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन,
- ग्रीष्मकालीन फसलों की उन्नत किस्में,
- कीट एवं रोग प्रबंधन,
- फसल विविधिकरण,
- पराली एवं नरवाई प्रबंधन।
किसानों की आय बढ़ाने की पहल
राज्य शासन का उद्देश्य है कि वैज्ञानिक सलाह, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचे।
‘कृषक कल्याण वर्ष’ के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।
