रासायनिक खाद-दवाओं पर 46 हजार होते थे खर्च, जीवामृत में सिर्फ 5 हजार

सस्ती जैविक खाद-कीटनाशक तैयार कर किसानों को दे रही संगीता

आदिवासी बाहुल्य धार जिले की किशन संगीता भाभर ने नवाचार कर नहीं रहा दिखाई है। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपना करना केवल अपनी खेती की लागत कम की बाल के आसपास के किसानों के लिए भी जीवामृत आधारित जैविक खेती का भरोसेमंद विकल्प तैयार किया है।

संगीता की जिंदगी एक दुर्घटना के बाद अचानक बदल गई। खेत से लौटते समय उनके पति सूखे कुएं में गिर गए जिससे उनके दोनों हाथ और एक पैर टूट गया।

इलाज में भारी खर्च हुआ तीन बच्चों के साथ परिवार की पूरी जिम्मेदारी संगीता पर आ गई। खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर बढ़ते खर्च स्थिति को और कठिन बना रहे थे।

इसी दौर में संगीता की मुलाकात समर्थन संस्था के एक कार्यकर्ता से हुई। उसने प्राकृतिक खेती ह्यउत्पादों की जानकारी दी।

 

गांव में खोला सेंटर

संगीता ने अपने ब्लॉक डही में जीवामृत केंद्र स्थापित किया। संस्था ने जैविक दवाइयां तैयार करने की यूनिट, एडवांस जीवामृत यूनिट, जैविक कीटनाशक और ग्रोथ प्रमोटर बनाने की सुविधा उपलब्ध कराई।

 

खर्चा घटा, मुनाफा बड़ा

संगीता के अनुसार रासायनिक खाद-दवाओं पर 46000 तक खर्च होते थे। एडवांस जीवामृत अपने के बाद खर्च 5000 रुपए रह गया।

पहली ही फसल में 41000 की बचत हुई। साल में यह बचत 84 हजार रुपए तक पहुंच गई। संगीता आसपास के किसानों को भी जीवामृत के उपयोग और जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रही है।