गेहूं और चने को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी

रबी फसलों पर मौसम की मार

मौसम परिवर्तन से गेहूं और चने की फसल में कीटों और रोगों का खतरा बढ़ा। कृषि वैज्ञानिकों ने चने की इल्ली और गेहूं के जड़-माहू के बचाव के लिए प्रभावी कीटनाशकों और उपायों की जानकारी दी है।

पिछले एक सप्ताह से मौसम में आए अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

रबी सीजन की मुख्य फसलों, गेहूं और चने में कीटों और रोगों के प्रकोप की आशंका को देखते हुए ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के तहत कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिक खेतों का भ्रमण कर रहे हैं।

विशेषज्ञों ने चने में इल्ली और गेहूं में जड़-माहू के बढ़ते खतरे को लेकर किसानों को सचेत किया है।

 

चने की फसल: पुष्पन और फलन पर संकट

कृषि विभाग सीहोर के उपसंचालक और कृषि वैज्ञानिक द्वारा बताया गया कि वर्तमान समय में चने की फसल पुष्पन एवं फलन वाली अवस्था पर है।

इस अवस्था में मौसम में परिवर्तन जैसे दिन में न्यूनतम तापमानहल्की बारिश होने के कारण पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सुचारू रूप से न होने के कारण चना फसल में पुष्पन प्रभावित होने के साथ-साथ फसल के पुष्प भी पीले पड़कर सूख रहे है।

जिसके चलते फसल में आर्थिक नुकसान होने की पूरी संभावना है और साथ ही फसल में चने की सुण्डी इल्ली के साथ-साथ उकटा व जड़-सड़न रोग के प्रकोप के कारण भी फसल सूख रही है।

जिसको देखते हुए कृषि विभाग द्वारा चना फसल की सुरक्षा के लिए इमामेक्टिन बेन्जोएट + प्रोफेनोफास 200 ग्राम/एकड़ या क्लोरोइन्ट्रानिलीप्रोल + लेम्ब्डासाइलोथ्रिन 80 मिली/एकड़ के साथ फ्लूपायराक्साइड + पायरोक्लोरोस्ट्रोबिन 150 मिली/एकड़ या एजोक्सीस्ट्रोबिन + टेबूकोनोजोल 150 मिली/एकड़ के साथ एनःपीःके 19:19:191 किग्रा/एकड़ से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

 

गेहूं फसल पर भी कीटों का ख़तरा

कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं में भी वर्तमान समय में जड़-माहू कीट व कठुआ इल्ली का प्रकोप प्रारम्भिक अवस्था से ही फसल पर बना हुआ है जिसके कारण फसल पीली पड़ कर सूख रही है व इल्ली के प्रकोप के कारण फसल की वानस्पतिक वृद्धि व बालियाँ प्रभावित हो रही है।

अतः किसानों को सलाह है कि उक्त कीटों के निदान हेतु इमामेक्टिन बेन्जोएट + प्रोफेनोफास 200 ग्राम/एकड़ के साथ एनःपीःके 19:19:191 किग्रा/ एकड़ की दर से 150 लीटर पानी में घेाल बनाकर छिड़काव करें।

साथ ही कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों की नियमित निगरानी करें और किसी भी समस्या की स्थिति में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क करें, ताकि समय रहते नुकसान से बचा जा सके।