कर रहे उन्नत खेती, फूलों की सप्लाई जयपुर भी
पहले सीमेंट कंपनी और फिर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के माध्यम से देश की सबसे लंबी टनल निर्माण करने वाली कंपनी में करीब 10 वर्ष तक 1.25 लाख रुपए प्रतिमाह बतौर सीनियर मैनेजर रहे संतोष शुक्ला।
उन्होंने नौकरी छोड़ खेती को अपना भविष्य बनाया। शहर से कुछ किलोमीटर दूर ग्राम खजुरी स्थित एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस का निर्माण कर गुलाब की खेती शुरू की।
वर्ष 2018 में पॉलीहाउस बनवाने में लगभग 53 लाख की लागत आई। तब से ये गुलाब की खेती कर रहे हैं।
लागत निकालने के बाद हर साल लगभग आठ लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ। संतोष के अनुसार मंडी भाव अनुकूल रहता है तो मुनाफा 10 लाख रुपए तक पहुंच जाता है।
फूलों की सप्लाई जयपुर, इंदौर की मंडियों में की जाती है। संतोष शुक्ला एक एकड़ खेत के शेष हिस्से में बासमती धान और शरबती गेहूं का जैविक तरीके से उत्पादन कर रहे हैं।
प्रेरणा और सहयोग
संतोष शुक्ला ने बताया कि खेती के लिए उन्हें पूर्व उद्यानिकी अधिकारी वीरेंद सिंह, कटनी कार्यालय में पदस्थ लिपिक जीएल प्रजापति से प्रेरणा और मार्गदर्शन मिला।
तकनीक से जुड़ी उन्नत खेती
पॉलीहाउस में खेती के लिए सैटेलाइट ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, मल्चिंग तकनीक, तापमान और नमी नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं अपनाई हैं। इससे पानी की बचत होती है।
उत्पादन की गुणवत्ता बनी रहती है। रोगों का प्रकोप कम होता है। संतोष क्षेत्र के किसानों के लिए मार्गदर्शक भी बन चुके हैं।
