मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका, लेकिन जलाशयों में पर्याप्त पानी
उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अनुसार वर्ष 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रह सकता है।
अनुमान है कि इस बार देशभर में मौसमी वर्षा दीर्घकालीन औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत के आसपास रहेगी। साथ ही मानसून के दौरान अल नीनो (El Nino) के विकसित होने की संभावना भी जताई गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर काफी संतोषजनक बना हुआ है। वर्तमान में कुल जल भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर के 127.01 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
यह बेहतर स्थिति खरीफ सीजन के दौरान सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने और मिट्टी में नमी की कमी के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कम वर्षा वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन राज्यों और जिलों में कम बारिश, लंबे ड्राई स्पेल या अल नीनो का अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जिला स्तरीय कंटिन्जेंसी प्लान केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
इन योजनाओं में जल उपलब्धता, फसल पैटर्न, बुवाई की प्रगति और बीज व्यवस्था जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए।
किसानों को मिलेंगे वैकल्पिक बीज और फसल विकल्प
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार क्षेत्र और फसल के अनुसार विशेष रणनीति तैयार कर रही है। जरूरत पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसल विकल्प, देर से बुवाई के लिए मार्गदर्शन, सूखा-सहनशील किस्में, कम अवधि में तैयार होने वाली फसलें और पुनर्बुवाई के लिए विशेष बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए बीजों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार रखा गया है।
बीज गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि केवल बीज की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों तक प्रमाणित और गुणवत्तायुक्त बीज पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि संभावित पुनर्बुवाई की स्थिति में कम पानी में तैयार होने वाली और कम अवधि की किस्मों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए।
जल संरक्षण और नमी प्रबंधन पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण विकास विभाग और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि खेतों में नमी बनाए रखने, जल संरक्षण, खेत-तालाब निर्माण और स्थानीय जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर तेजी से काम किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि वर्षा सामान्य से कम भी होती है, तो प्रभावी जल प्रबंधन और नमी संरक्षण तकनीकों के जरिए फसलों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
वर्षा अंतराल की स्थिति के लिए भी तैयारी
बैठक में 2 से 4 सप्ताह तक बारिश नहीं होने जैसी संभावित परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी स्थिति में जीवनरक्षक सिंचाई, पुनर्बुवाई योजना, वैकल्पिक फसलें, कम अवधि वाली किस्में और जिला-विशिष्ट कृषि सलाह पहले से तैयार रखी जाए, ताकि किसानों को समय पर मार्गदर्शन मिल सके।
रोग और कीट प्रबंधन की अग्रिम तैयारी
मौसम में बदलाव के कारण फसलों में रोग और कीट प्रकोप बढ़ने की संभावना को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने अग्रिम निगरानी और चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि संभावित रोगों और कीटों की पहचान, निगरानी और उनके उपचार संबंधी सलाह पहले से तैयार कर किसानों तक पहुंचाई जाए।
डिजिटल माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी जानकारी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा का बेहतर उपयोग कर किसानों तक सीधे मोबाइल संदेश, मौसम अपडेट, चेतावनी और कृषि सलाह पहुंचाने की व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगी।
इसके लिए राज्यों, कॉल सेंटरों, कृषि अधिकारियों और डिजिटल माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
किसानों के हित सर्वोपरि
बैठक के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जोखिम का आकलन करना नहीं, बल्कि समय रहते ठोस कदम उठाकर किसानों का आत्मविश्वास बनाए रखना है, ताकि खरीफ सीजन पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर जल प्रबंधन, पर्याप्त बीज भंडार, आधुनिक कृषि तकनीक, वैकल्पिक फसल रणनीति और केंद्र-राज्य समन्वय के जरिए संभावित अल नीनो और कमजोर मानसून की चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
