खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के लिए सोयाबीन की बुवाई का समय आ गया है। सही तरीके से बुवाई करने पर इस फसल से बेहतर उत्पादन और मुनाफा हासिल किया जा सकता है।
मानसून की दस्तक के साथ खेतों में हलचल बढ़ गई है और किसान सोयाबीन की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। यदि सही तकनीक अपनाई जाए, तो इस फसल से अच्छी पैदावार पाई जा सकती है।
बुवाई का सही समय
- सोयाबीन की बुवाई का सबसे अच्छा समय: मध्य जून से जुलाई (मानसून शुरू होते ही)
- समय पर बुवाई से पैदावार ज्यादा मिलती है
भूमि और तैयारी
- अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर
- खेत को 2–3 बार जुताई करके भुरभुरा बनाएं
- आखिरी जुताई में पाटा लगाएं ताकि नमी बनी रहे
बीज की मात्रा और किस्म
- बीज दर: 70–75 किलो प्रति हेक्टेयर
- उन्नत किस्में: JS-95-60, JS-20-29, NRC-37 आदि
बीज उपचार (बहुत जरूरी)
- फफूंदनाशक (Carbendazim/Thiram) से उपचार
- उसके बाद राइजोबियम कल्चर लगाएं
👉 इससे अंकुरण अच्छा होता है और उत्पादन बढ़ता है
बुवाई की विधि
- कतार से कतार दूरी: 30–45 सेमी
- पौधे से पौधे दूरी: 5–10 सेमी
- गहराई: 3–5 सेमी
👉 ज्यादा गहराई में बीज न डालें
खाद और उर्वरक
- बेसल डोज (प्रति हेक्टेयर):
- नाइट्रोजन: 20–25 kg
- फास्फोरस: 60–80 kg
- जैविक खाद (गोबर) भी डालें
खरपतवार नियंत्रण
- बुवाई के 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई
- जरूरत हो तो weedicide (Pendimethalin) का उपयोग
जरूरी सावधानियां
- पानी जमा न होने दें (सोयाबीन को पानी भराव पसंद नहीं)
- समय पर कीट/रोग नियंत्रण करें
- बहुत देर से बुवाई करने से नुकसान होता है
निष्कर्ष : अगर आप सही समय, सही दूरी और बीज उपचार के साथ बुवाई करते हैं तो सोयाबीन से अच्छा उत्पादन और मुनाफा मिल सकता है।
