मिट्टी की बनी रहेगी सेहत, किसानों को आर्थिक लाभ
खेती-किसानी में तकनीक का समावेश अब किसानों की राह आसान कर रहा है।
रसायनों के बढ़ते प्रयोग और कीटनाशकों पर होने वाले भारी खर्च से परेशान किसानों के लिए ‘सौर ऊर्जा चालित कीट नियंत्रण प्रणाली’ एक क्रातिकारी समाधान बनकर उभरी है।
यह तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी कम कर रही है।
लागत में कमी
विशेषज्ञों के अनुसार एक किसान सीजन में हजारों रुपए महंगे कीटनाशकों पर खर्च कर देता है। सौर ऊर्जा चालित लाइट ट्रैप एक बार का निवेश है, जो लगभग 3 से 5 साल तक चलता है।
इससे रसायनों का छिड़काव 40 से 60 फीसदी तक कम किया जा सकता है, जिससे फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
पर्यावरण के लिए हितकारी
लगातार कीटनाशकों के प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता कम होती है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होते हैं।
सौर तकनीक का उपयोग करने से मित्र कीट जैसे मधुमक्खियां सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि वे रात में सक्रिय नहीं होते, जबकि शत्रु कीट लाइट की ओर खिंचे चले आते हैं।

कैसे काम करता है यह उपकरण?
यह उपकरण सूर्य की रोशनी से चार्ज होने वाली बैटरी से चलता है। इसमें एक विशेष वेवलेंध की अल्ट्रावॉयलेट लाइट लगी होती है, जो रात के अंधेरे में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों जैसे फली छेदक, तना छेदक और पतंगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
लाइट के ठीक नीचे एक बर्तन में पानी, हल्का कीटनाशक या साबुन का घोल रखा जाता है, जिसमें गिरकर कीट नष्ट हो जाते हैं। जिससे फसलों को नुकसान नहीं होता है।
