कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की ‘प्रगति’ पहल; 20,000 युवा बनेंगे कृषि-उद्यमी

20 लाख किसानों की आय 30% बढ़ाने का लक्ष्य

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘प्रगति’ (PRAGATI) पहल का शुभारंभ किया। इसके तहत 20,000 ग्रामीण युवाओं को एग्री-बिजनेस से जोड़कर 20 लाख छोटे किसानों की आय में 30% बढ़ोतरी का लक्ष्य है। जानें पूरी योजना।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के ग्रामीण युवाओं और छोटे किसानों के भविष्य को बदलने वाली एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल ‘प्रगति’ (PRAGATI) का शुभारंभ किया है।

इस बहु-साझेदार (Multipartner) योजना का मुख्य उद्देश्य 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी (AgriEntrepreneurs) बनाना है, जो देश भर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय और आजीविका में सुधार लाएंगे।

इस योजना को भारत में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के गठबंधन से चलने वाला अब तक का सबसे बड़ा कृषि-उद्यमिता कार्यक्रम माना जा रहा है।

 

‘प्रगति’ पहल के 3 मुख्य लक्ष्य

कृषि मंत्रालय ने इस योजना के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन बेहद स्पष्ट और बड़े लक्ष्य तय किए हैं:

  1. आय में 30% की न्यूनतम वृद्धि: योजना से जुड़े लघु एवं सीमांत किसानों की वास्तविक आय में कम से कम 30 प्रतिशत का इजाफा करना।
  2. पैदावार में 15-20% की बढ़ोतरी: आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से धान, मक्का और आलू जैसी मुख्य फसलों की उत्पादकता को 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाना।
  3. पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture): कम से कम 20% किसानों को पर्यावरण-अनुकूल और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना।

 

इन 8 राज्यों में पहले चरण में लागू होगी योजना

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि ‘प्रगति’ पहल को देश के प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में प्रमुखता से लागू किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं:

  • मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड।

ये तैयार किए गए कृषि-उद्यमी गांव के स्तर पर ही किसानों को मिट्टी परीक्षण (Soil Testing), आधुनिक मशीन सेवाएं, वित्तीय लोन लिंकेज, सीधे बाजार से कनेक्टिविटी और वैकल्पिक आय के साधन उपलब्ध कराएंगे।

 

इस तरह किसानों की आय में होगा सुधार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना समृद्ध गांवों के बिना अधूरा है।

उन्होंने कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है। हमें वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन), प्रोसेसिंग और विविधीकरण की ओर बढ़ना होगा।

बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों को अपनाकर ही किसानों की आय में गुणात्मक सुधार लाया जा सकता है। ड्रोन, डिजिटल सलाह और वैज्ञानिक खेती ही हमारे भविष्य का आधार हैं।

 

‘कृषि सखी’ और महिलाएं बनेंगी बदलाव की धुरी

इस पहल में महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि बड़ी संख्या में कृषि सखी और महिला उद्यमी इस अभियान का नेतृत्व करेंगी।

जब एक महिला ग्रामीण स्तर पर उद्यमी बनती है, तो वह पूरे गांव की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है।

 

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं आई साथ

‘प्रगति’ पहल को तकनीकी, वित्तीय और जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए कई बड़े वैश्विक और राष्ट्रीय संगठनों ने हाथ मिलाया है।

इस नेटवर्क में शामिल प्रमुख नाम हैं:

  • वित्तीय एवं सामाजिक संगठन: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), पेप्सिको फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन।
  • अंतरराष्ट्रीय एवं तकनीकी पार्टनर: IDHHeifer International, एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (EDF)।
  • क्रियान्वयन पार्टनर: एग्री एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF), ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF), द सस्टेनेबल एग्रीकल्चर फाउंडेशन्स इंटरनेशनल एसोसिएशन (SAFIA) और ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप अकादमी।

यह विशाल पार्टनर नेटवर्क मिलकर किसानों को प्रशिक्षण, डिजिटल समावेशन, औपचारिक बैंकिंग प्रणाली (Formal Finance) तक पहुंच और जलवायु-सहनशील (Climateresilient) खेती के गुर सिखाएगा।

यह कार्यक्रम पहले से काम कर रहे 26,000 कृषि-उद्यमियों के इकोसिस्टम को और विस्तार देते हुए ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गेम-चेंजर साबित होगा।

 

किसानों के लिए इसका क्या मतलब?

यदि यह कार्यक्रम निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लागू होता है, तो ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

वहीं छोटे और सीमांत किसानों को गांव स्तर पर तकनीकी सलाह, आधुनिक कृषि सेवाएं और बाजार से जुड़ने में सहायता मिलने की संभावना है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में सुधार हो सकता है।