केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जुलाई में बारिश बढ़ने से कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 रह गई है।
जानें खरीफ बुवाई, बीज, फसल बीमा और कंटिंजेंसी प्लान की पूरी जानकारी।
देश में अल नीनो के संभावित प्रभाव और मानसून की अनिश्चितता के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जुलाई में बारिश की स्थिति में सुधार होने से कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 रह गई है।
केंद्र सरकार लगातार राज्यों के साथ समन्वय कर खरीफ सीजन को प्रभावित होने से बचाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही है।
कम वर्षा वाले जिलों की संख्या घटी
केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से चर्चा में बताया कि जून महीने में देश में 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई की शुरुआत के साथ ही स्थिति में तेजी से सुधार आया है।
- बारिश की कमी में सुधार: अब वर्षा की कमी घटकर 24 प्रतिशत रह गई है।
- जिलों को राहत: देश के कई हिस्सों में हुई अच्छी बारिश के कारण कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 पर आ गई है।
इन 13 राज्यों पर रखी जा रही है विशेष नजर:
सरकार मानसून की चाल और फसलों की स्थिति को देखते हुए देश के प्रमुख कृषि राज्यों पर कड़ी निगरानी रख रही है, जिनमें शामिल हैं:
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा
खरीफ बुवाई अभी भी पिछले वर्ष से पीछे
अब तक देश में 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 91.95 लाख हेक्टेयर कम है।
मानसून में देरी का असर सोयाबीन और कपास पर पड़ा है, लेकिन किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि और कम पानी वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है।
कमजोर मानसून से निपटने के लिए सरकार ने उठाये यह क़दम
शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए अप्रैल महीने से ही कमर कस ली थी।
इसके लिए जमीनी स्तर पर कई बड़े कदम उठाए गए हैं:
- कंटिंजेंसी प्लान (आपातकालीन योजना): भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से संभावित प्रभावित जिलों के लिए विशेष कंटिंजेंसी प्लान तैयार कर राज्यों के साथ साझा किए जा चुके हैं।
- खेत बचाओ अभियान: जून महीने में चलाए गए इस अभियान के तहत 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे 80 लाख से ज्यादा किसानों को सीधे जागरूक किया गया।
- राष्ट्रीय बीज भंडार: किसी भी आपात स्थिति में बुवाई प्रभावित न हो, इसके लिए 1.75 लाख क्विंटल का ‘नेशनल सीड रिजर्व’ तैयार रखा गया है।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) अभियान: वित्तीय सुरक्षा के तहत 30 जून तक प्राप्त 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक केसीसी को मंजूरी दी जा चुकी है।
- फसल बीमा का सुरक्षा कवच: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों की भागीदारी लगातार बढ़ाई जा रही है, ताकि फसल नुकसान की स्थिति में उन्हें पूरी आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
सरकार मानसून की स्थिति पर लगातार बनाए हुए है नजर
अल नीनो की हर गतिविधि और कृषि पर इसके असर को ट्रैक करने के लिए सरकार की कई विंग्स चौबीसों घंटे काम कर रही हैं:
- अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल
- क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप
- राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम
इन सभी विभागों के अधिकारियों को लगातार मानसून, बुवाई, फसलों की सेहत और बाजार के उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के इस कदम से साफ है कि वह हर चुनौती का सामना करने के लिए पर्याप्त संसाधनों और समयबद्ध रणनीति के साथ पूरी तरह मुस्तैद है।
