जबलपुर : खजरी कला की अर्चना बनीं जैविक खेती की प्रेरणा, किसानों को दे रहीं प्रशिक्षण
लगातार बढ़ रही इन बीजों की मांग
जबलपुर, जैविक खेती की सफलता का आधार शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण बीज माने जाते हैं, लेकिन ऐसे बीज बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होते। यदि मिलते भी हैं तो उनकी कीमत अधिक होती है।
इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए खजरी कला गांव की प्रगतिशील महिला किसान अर्चना सोनी ने वर्षों पहले अपने खेत में ही ऑर्गेनिक बीज तैयार करना शुरू किया।
आज वे गेहूं और धान की कई देशी एवं पारंपरिक किस्मों के बीज तैयार कर अन्य किसानों को उपलब्ध करा रही हैं।
खेती में नवाचार करते हुए उन्होंने ऑर्गेनिक माइक्रोग्रीन उत्पादन भी शुरू किया है, जिससे उनकी आय का नया स्रोत विकसित हुआ है। साथ ही वे किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
चार एकड़ में विकसित किया नवाचार मॉडल
अर्चना ने चार एकड़ पर ऐसा जैविक खेती मॉडल विकसित किया है, जो किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। है। तीन एकड़ में गेहूं, धान और अन्य अनाज की खेती करती हैं।
एक एकड़ क्षेत्र को प्रयोग के लिए सुरक्षित रखा है। इसी में बीज उत्पादन, माइक्रोग्रीन, नई फसलों का परीक्षण, जैविक खेती की तकनीकों पर काम किया जाता है।
श्रेष्ठ पौधों का किया चयन
बाजार में मिलने वाले बीजों की गुणवत्ता और जैविक शुद्धता को लेकर संशय के कारण अर्चना सोनी ने हर वर्ष अपनी फसल के श्रेष्ठ पौधों का चयन कर बीज तैयार करने और संरक्षित करने की शुरुआत की।
अर्चना के अनुसार वर्तमान में वे खपनी, लोकमान और शरबती गेहूं के साथ छत्तीसगढ़ी, बासमती, चिन्नौर और दुबराज धान के जैविक बीज तैयार कर रही हैं।
इन बीजों की मांग लगातार बढ़ रही है। वे फसल चक्र अपनाकर अलग-अलग जैविक फसलें उगाती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है और गुणवत्तापूर्ण बीज भी तैयार हो जाते हैं।
अतिरिक्त आय हो रही
उन्होंने पालक, मेथी, धनिया, लाल भाजी, चना, मूंग और चुकंदर के ऑर्गेनिक माइक्रोग्रीन का उत्पादन शुरू किया है। इनकी बाजार में अच्छी मांग है, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
माइक्रोग्रीन खेत की मिट्टी के बजाय कोकोपीट में तैयार किए जाते हैं और अंकुरण के सात से 15 दिन के भीतर तैयार हो जाते हैं।
पोषण से भरपूर सुपरफूड
विशेषज्ञों के अनुसार माइक्रोग्रीन में सामान्य हरी सब्जियों की तुलना में चार से 40 गुना तक अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं।
प्रति 100 ग्राम माइक्रोग्रीन में लगभग दो ग्राम प्रोटीन के साथ पर्याप्त फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद रहते हैं।
कम समय में तैयार होने वाला यह सुपरफूड स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और किसानों के अतिरिक्त आय का बेहतर लिए विकल्प बन रहा है।
प्रगतिशील महिला किसान अर्चना सोनी ने कहा कि खेती का भविष्य केवल अधिक उत्पादन में नहीं, बल्कि शुद्ध बीज, स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ खेती में है। यदि किसान स्वयं बीज तैयार करें तो खेती की लागत कम होती है और उत्पादन अधिक टिकाऊ बनता है।
