MP में हर विधानसभा में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान

मध्य प्रदेश में हर विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्र किराये की दुकान खोलने की तैयारी। छोटे किसानों को कम शुल्क पर आधुनिक कृषि यंत्र मिलेंगे।

विदिशा के कृषि यंत्र अब 10 से अधिक देशों में निर्यात हो रहे हैं। जानें पूरी योजना।

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और उनकी लागत कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक “कृषि यंत्र किराये की दुकान” अनिवार्य रूप से खोलने की तैयारी की जा रही है। 

‘कृषक कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत शुरू की गई इस पहल से राज्य के किसानों को न्यूनतम सेवा शुल्क पर आधुनिक कृषि उपकरण आसानी से मिल सकेंगे।

 

हर साल खुलेंगी 1060 नई कृषि यंत्र किराये की दुकानें

वर्तमान में मध्य प्रदेश में ऐसे 5,260 केंद्र सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। नई योजना के तहत अब राज्य में हर साल 1060 नई कृषि यंत्र किराये की दुकानें स्थापित की जाएंगी।

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन छोटे और सीमांत किसानों को होगा, जो महंगे ट्रैक्टर, लेवलर, कल्टीवेटर, प्लाउ या लोडर जैसी मशीनें खरीदने में सक्षम नहीं हैं।

अब वे बहुत ही कम किराये पर इन उपकरणों का उपयोग कर अपने खेतों की तैयारी, बोनी और कटाई का काम आसानी से कर सकेंगे।

इसके अलावा, इस व्यवस्था से ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

 

कृषि उपकरणों के निर्माण में ‘आत्मनिर्भर’ बनता विदिशा

एक तरफ जहाँ किसानों को उपकरण किराये पर दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश अब कृषि यंत्रों के निर्माण में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। 

विदिशा जिला इसका एक आदर्श उदाहरण बन चुका है। विदिशा में वर्तमान में लगभग 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयाँ काम कर रही हैं।

यहाँ ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रोलिक्स ट्रॉली, कल्टीवेटर और प्लाउ जैसे उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण बनाए जा रहे हैं।

 

10 से अधिक देशों में हो रहा निर्यात

विदिशा में बने कृषि यंत्रों की माँग न केवल मध्य प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में है, बल्कि विदेशों में भी इनकी भारी माँग है।

यहाँ से निर्मित उपकरण मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, यूगांडा, घाना, अल्जीरिया, ग्वाटेमाला, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे 10 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।

 

स्थानीय उद्यमियों ने साझा की सफलता की कहानी
  • उषा एग्रो (मानस गुप्ता): 1993 में छोटे पैमाने पर शुरू हुई उषा एग्रो का सालाना कारोबार आज लगभग 4 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। इनका 1/3 कारोबार विदेशों में होता है। मानस गुप्ता बताते हैं कि डॉ. मोहन यादव सरकार की नीतियों से उत्पादन और व्यापार विस्तार में काफी मदद मिली है। सरकार की सहायता से वे जी-20 सम्मेलन में भी शामिल हुए, जिसमें 75% खर्च सरकार ने वहन किया था।
  • एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी (दीपक नरवरिया): इनका सालाना कारोबार करीब 3 करोड़ रुपये है। इनके द्वारा निर्मित यंत्रों की खपत मध्य प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर हो रही है।
  • संजय उद्योग (विष्णु शर्मा): कोरोना काल (2020) में शुरू हुए इस उद्योग का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये पहुँच गया है। यह इकाई ट्रैक्टर से जुड़े कल्टीवेटर और प्लाउ जैसे उपकरण बनाती है।
  • मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज (विपिन रघुवंशी): यह इकाई कल्टीवेटर, प्लाउ, लोडर और डिलोडर जैसे उपकरण बनाती है, जो रोपाई से लेकर कटाई तक किसानों के हर चरण में काम आते हैं।

 

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल किसानों के लिए खेती को अधिक आधुनिकसस्ती और लाभदायक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

हर विधानसभा में कृषि यंत्र किराये की दुकान खुलने से हजारों किसानों को सीधे लाभ मिलेगावहीं कृषि यंत्र निर्माण और निर्यात के माध्यम से प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।