फसल बिमा योजना : अब इन नई तकनीकों से होगा फसल नुकसान का आकलन

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में फसल बीमा योजना (PMFBY), WINDS नेटवर्क, YES-TECH और डिजीक्लेम मॉड्यूल से जुड़े बड़े अपडेट साझा किए।

जानिए कैसे तकनीक से किसानों के दावों का त्वरित निपटान हो रहा है।

केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

 अब किसानों की फसल का आकलन केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं बल्कि सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS), रिमोट सेंसिंग और डिजिटल मोबाइल ऐप की मदद से किया जाएगा।

इससे फसल नुकसान का आकलन अधिक सटीक होगा और किसानों को बीमा दावों का भुगतान भी पहले की तुलना में तेजी से मिल सकेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से इन नई तकनीकी पहलों की जानकारी दी।

 

मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा प्रणाली (WINDS)

दीर्घकालिक हाइपरलोकल मौसम आंकड़े तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) और स्वचालित वर्षामापी यंत्र (ARG) स्थापित किए जा रहे हैं।

  • उपयोगिता: फसल बीमा, कृषि परामर्श और विभिन्न क्षेत्रों की आपदा जोखिम अनुकूलन आवश्यकताओं के लिए बेहद उपयोगी।
  • विस्तार: इसे अब तक 7 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों (असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) द्वारा अपनाया गया है।
  • प्रगति: 16,843 स्थलों पर इंस्टालेशन की मंजूरी दी जा चुकी है, 1,188 स्थलों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है और 892 AWS/ARG स्थापित किए जा चुके हैं।

 

रिमोट सेंसिंग से उपज आकलन: YES-TECH की भूमिका

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत निष्पक्ष एवं सटीक फसल उपज आकलन के लिए यस-टेक (YES-TECH) को लागू किया गया है:

  • शुरुआत: खरीफ 2023 से धान और गेहूं तथा खरीफ 2024 से सोयाबीन की फसल के लिए इसे अनिवार्य रूप से 30% वेटेज दिया गया।
  • यस-टेक को वर्ष 2025-26 में 12 राज्यों के 344 जिलों में कार्यान्वित किया गया।
  • मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने प्रौद्योगिकी आधारित उपज को 100% वेटेज दिया है, जबकि महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश राज्य सरकारों ने 50% वेटेज तथा ओडिशा एवं कर्नाटक राज्य सरकारों ने वर्ष 2025-26 में यस-टेक आधारित उपज को 40% वेटेज दिया है।

 

फसल बीमा दावों के समयबद्ध निपटान हेतु प्रमुख वित्तीय एवं तकनीकी कदम

सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) को एकल स्रोत के रूप में विकसित किया है। इसके अलावा कई ऐतिहासिक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं:
  • डिजीक्लेम (DigiClaim) मॉड्यूल: खरीफ 2022 से संचालित इस मॉड्यूल के जरिए NCIP, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और बीमा कंपनियों के खातों का एकीकरण किया गया है, जिससे दावों की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर होती है।
  • बीमा कंपनियों पर: खरीफ 2024 से यदि बीमा कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती, तो स्वचालित रूप से 12% दंड लागू होता है।
  • राज्य सरकारों पर: खरीफ 2025 से राज्य सब्सिडी शेयर जारी करने में देरी करने पर राज्यों पर भी 12% जुर्माना लगाया जाता है।
  • एस्क्रो खाता (ESCROW Account): खरीफ 2025 सीजन से राज्य सरकारों के लिए अग्रिम प्रीमियम शेयर जमा करने हेतु एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • प्रथक्कीकृत सब्सिडी: केंद्र के प्रीमियम हिस्से को राज्यों के हिस्से से अलग किया गया है ताकि किसानों को आनुपातिक दावों का तुरंत भुगतान मिल सके।

 

CLAP App से होगा खेत स्तर पर नुकसान का आकलन

सरकार ने क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (Crop Loss Assessment Ap-CLAP) भी विकसित किया है। इस ऐप की मदद से—

  • स्थानीय आपदा से हुए नुकसान का आकलन
  • एकल खेत स्तर पर निरीक्षण
  • फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का रिकॉर्ड

डिजिटल तरीके से तैयार किया जाएगा। अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए CLAP App का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

 

CCE Agri-App से डिजिटल होगी फसल कटाई प्रक्रिया

फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiment) के आंकड़े अब CCE Agri-App के माध्यम से एकत्र किए जा रहे हैं। इससे—

  • डेटा संग्रहण तेज होगा।
  • मानवीय त्रुटियां कम होंगी।
  • उपज का वैज्ञानिक आकलन होगा।
  • बीमा क्लेम तेजी से निपटाए जा सकेंगे।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में AI, सैटेलाइट तकनीक, WINDS, YES-Tech, DigiClaim, NCIP और CLAP App जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियों का उपयोग भारतीय कृषि को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

इससे फसल नुकसान का निष्पक्ष आकलन, मौसम की बेहतर जानकारी और बीमा दावों के समयबद्ध भुगतान में सुधार होने की उम्मीद है।

किसानों के लिए यह पहल भविष्य में अधिक पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद फसल बीमा व्यवस्था सुनिश्चित कर सकती है।