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गाय और भैंस का ‘आधार कार्ड’ होता है उनके कान में लगा हुआ टैग

 

गाय और भैंस का ‘आधार कार्ड’

 

केंद्र सरकार राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गाय, भैंस, सुअर और बकरी के कानों में टैग लगाने की योजना पर काम कर रही है.

जिसके तहत देशभर में 14.62 करोड पशुओं की टैगिंग करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

 

गाय- भैंस समेत अन्य जुगाली करते हुए जानवरों को आपने देखा ही होगा, इस दौरान कई गाय और भैंस के कानों में एक टैग भी लगा हुआ भी दिखाई देता है.

गाय और भैंस के कान में लगे इस टैग को उनका आधार कार्ड भी कहा जाता है.

अरे… अरे… आधार कार्ड तो भारत के लोगों का बनाया जाता है. जिसमें लोगों की विशिष्ट पहचान संख्या दर्ज होती है.

कुछ इसी तरह गाय और भैंसों के कानों में लगाया जाने वाले टैग का भी महत्व है, जो उनके लिए किसी आधार कार्ड से कम नहीं है.

इस लेख की शाब्दिक यात्रा में जानते हैं कि गाय ओर भैंसों के कानों में लगाया जाने वाला टैग क्या है और पशुपालकों को इसको लगाने के क्या फायदे मिल सकते हैं.

 

केंद्र सरकार की एक योजना के तहत टीकाकरण से पहले लगाया जाता है यह टैग

गाय, भैंस, बकरी और सुअर के कानों में यह टैग लगाया जाता है. यह प्रक्रिया केंद्र सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम का एक हिस्सा है.

इस कार्यक्रम के तहत पशुओं को एफएमडी, खुरहा एंव मुहपका एवं ब्रुसलोसिस का टीका लगाया जाता है.

इससे पूर्व टीकाकरण की जानकारी अपडेट रखने और पहचान के लिए पशुओं के कानों में टैग लगाया जाता है.

इस टैग के माध्यम से पशुओं को भी 12 अंकों का एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती है.

जिसके माध्यम से समय-समय पर टीकाकरण की जानकारी अपडेट की जाती है.

पशुओं का पंजीकरण सूचना नेटवर्क पशु उत्पादकता और स्वास्थ प्लेटफार्म पर अपलोड किया जाता है.

 

14.62 करोड़ पशुओं की टैगिंंग करने का लक्ष्य, प्लास्टिक का होता है टैग

केंद्र सरकार ने अपने इस कार्यक्रम के तहत गाय, भैंस, सुअर और बकरी के कानों में टैग लगाने की योजना पर काम कर रही है.

जिसके तहत देशभर में 14.62 करोड पशुओं की टैगिंग करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

वहीं पशुओं के कानों में लगाए जाने वाले इस टैग की बात करें तो यह टैग प्लास्टिक का होता है.

जिसमें 12 अंक दर्ज होते हैं. इसे लगाने से पहले पशुओं के कान स्परिट से साफ किए जाते हैं फिरप्लास्टिक के इस टैग को एपलिकेटर के माध्यम से कान की बड़ी नसों को बचाते हुए लगा दिया जाता है.

 

इस टैग से कई योजनाओं का मिलता है लाभ

यह टैग, जितना पशुओं के लिए लाभदायक है, उतना ही यह पशुपालकोंं के लिए भी फायदेमंद है.

टैग के आधार पर पशुपालक पशुपालन से जुड़ी कई योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उठा सकते हैं.

असल में विभिन्न योजनाओं में टैग लगे हुए रजिस्ट्रेट पशुओं को प्राथमिकता दी जाती है. वहीं पशुबीमा में इस टैग को अनिवार्य किया गया है.

जबकि पशुओं के चोरी होने की स्थिति में यह टैग बेहद लाभदायक है, जिसके माध्यम से पशुओं का पता लगाया जा सकता है.

source : tv9

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