गर्मियों की गहरी जुताई ही कीटनाशकों का खर्च घटाने का सबसे सस्ता फॉर्मूला

हर सीजन दवाओं पर हजारों खर्च करने से बेहतर है 2 से 3 साल में एक बार 9 से 12 इंच गहरी जुताई करें; खरपतवार, जड़ गलन और भूमिगत कीटों से भी राहत मिलेगी

जून में खेत पलटिए, आधे कीट-रोग यहीं खत्म होंगे

गहरी जुताई से 25% तक बढ़ सकता है उत्पादन

अक्सर किसान फसल कटने के बाद खेत को ऐसे ही छोड़ देते हैं और सीधे मानसून आने पर ही जुताई करते हैं। कृषि वैज्ञानिक इसे एक बड़ी रणनीतिक चूक मानते हैं।

जून की तपती धूप का इस्तेमाल अगर ‘गहरी जुताई’ के लिए सही तरह से किया जाए, तो फसल में लगने वाली 50% बीमारियों और कीटों को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता है।

बहुत से किसान शुरुआत में गहरी जुताई की लागत से बचते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें बाद में महंगी कीटनाशक दवाओं और लेबर खर्च के रूप में भुगतना पड़ता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि गर्मियों में गहरी जुताई से मिट्टी के भीतर छिपे कीट तेज धूप – के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। सही तरीके से की गई गहरी जुताई से उत्पादन में 25% तक बढ़ोतरी संभव है।

 

गर्मियों में गहरी जुताई क्यों जरूरी….

  • जून में तेज तापमान मिट्टी के प्राकृतिक सौरीकरण का काम करता है। मिट्टी पलटने से नीचे की पोषक तत्वयुक्त मिट्टी ऊपर आती है।
  • खेत की सख्त परत टूटने से जड़ों को गहराई तक फैलने का मौका मिलता है।
  • बारिश का पानी ज्यादा देर तक मिट्टी में रुकता है, जिससे पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है।
  • अगली फसल में कीटनाशक और निंदाई-गुड़ाई का खर्च कम हो सकता है।
  • जहां लगातार एक ही फसल ले रहे हैं, वहां गहरी जुताई और भी जरूरी हो जाती है।

 

गहरी जुताई के लिए स्मार्ट टिप्स….

  • फसल कटने के तुरंत बाद जुताई सबसे बेहतर।
  • मिट्टी पलटने वाला हल (एमबी प्लाऊ) उपयोग करें।
  • सामान्य हल से गहरी जुताई का पूरा फायदा नहीं मिलता।
  • कम से कम 9 से 12 इंच गहराई तक जुताई करें।
  • हर 2 से 3 साल में एक बार गहरी जुताई जरूरी।
  • जुताई के साथ गोबर खाद मिलाने से ज्यादा फायदा मिलेगा।

 

सूखे के खिलाफ ‘इंश्योरेंस’ है यह जुताई

मध्य प्रदेश में मानसून की अनिश्चितता एक बड़ी समस्या है। गहरी जुताई के बाद मिट्टी में मिट्टी के ढेले बनते हैं, जिससे वर्षा जल जमीन में तेजी से समाता है।

मानसून के बीच सूखे जैसी स्थिति बनने पर यही नमी फसल को बचाती है। इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता इतनी बढ़ जाती है कि अगर मानसून के बीच में 15-20 दिनों का सूखा भी पड़े, तो मिट्टी की गहराई में जमा नमी फसल को मुरझाने नहीं देती। यह एक तरह से कुदरती ‘फसल बीमा’ की तरह काम करता है।

 

ये काम करेंगे तो मिलेगा ज्यादा फायदा

जुताई के तुरंत बाद खेत में गोबर खाद, फसल अवशेष या अन्य कार्बनिक पदार्थ मिला दिए जाएं, तो मिट्टी की जैविक गुणवत्ता तेजी से सुधरती है।

तेज धूप और खुली मिट्टी के कारण ये पदार्थ अच्छी तरह सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं। इससे इससे अगली फसल को पोषक तत्व जल्दी मिलते हैं और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।

हालांकि गहरी जुताई का सबसे ज्यादा फायदा तब मिलता है, जब जुताई केर जुताई के बाद खेत को कम से कम 10 से 15 दिन तक खुली धूप मिले। इसी दौरान सूर्य की तेज गर्मी मिट्टी के भीतर मौजूद कीटों के अंडे, लार्वा और फफूंद को खत्म करती है।

 

कीटनाशकों का खर्च ऐसे होगा कम

गर्मी की गहरी जुताई से किसान का सबसे बड़ा खर्च ‘कीटनाशकों’ पर कम होता है। जब जून की गर्मी में मिट्टी पलट दी जाती है, तो खरपतवारों के बीज और जड़ें जलकर खत्म हो जाती हैं।

इससे लेबर का खर्च 30% तक घट जाता है। इसके अलावा, फसलों में लगने वाले भूमिगत रोग जैसे ‘उखटा’ और ‘जड़गलन’ के रोगाणु सूर्य की किरणों से स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं।

सब्जियों की जड़ों में गांठ बनाने वाले ‘सूत्रकर्मी’ (नेमाटोड्स) भी इस प्रक्रिया में खत्म हो जाते हैं, जिससे बाद में महंगी फफूंदनाशक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती।