किसानों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण
किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इस प्रशिक्षण में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भाग लेकर किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक किया।
फसल उत्पादन की लागत कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ ही गुणवत्ता युक्त उत्पाद तैयार करने के लिए सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके लिए अधिक से अधिक किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
इस कड़ी में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भी अपने खेत में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की है।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा को ‘प्राकृतिक खेती का हब’ बनाने की घोषणा की है।
रीवा जिले के हरिहरपुर में आयोजित तीन दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने शिरकत की और किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बचाती है, बल्कि यह हमारे और हमारे परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी वरदान है।
उपमुख्यमंत्री भी कर रहे हैं अपने खेत में प्राकृतिक खेती
उप मुख्यमंत्री शुक्ल केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खुद इसे अमल में ला रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने अपने निजी खेत के 4 एकड़ क्षेत्र में गेहूं और 1 एकड़ में सब्जियों की प्राकृतिक खेती शुरू की है।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने स्वयं खेत में ‘जगपावनी’ का छिड़काव किया और ‘गौकृपा अमृत’ के निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमें अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आदत में डालना होगा। रीवा जिले में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है, इसलिए उन्हें सही दिशा में खेती करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती उत्पादन के संबंध में गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किसानों में से ही मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे जो जिले के अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती के संबंध में प्रशिक्षण देंगे।
प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण में किसानों को दी जाएगी यह जानकारी
हरिरहरपुर में 25 जनवरी तक प्राकृतिक खेती का तीन दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। श्री श्री रविशंकर की संस्था लिविंग ऑफ आर्ट के प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती के लिए भूमि तैयार करने, बीजों के उपचार, केमिकल रहित खाद तथा कीटनाशक बनाने एवं मल्टीलेयर फसल की जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, पंचगव्य जगपावनी, अग्निहोत्र निर्माण, गौकृपा अमृत, अमृत जल/भस्म जल, भस्म खाद, धूम्र चिकित्सा, नीमास्त्र, ब्रहृमास्त्र, आग्नेयास्त्र, ताम्रदही तथा आवर खाद निर्माण की भी जानकारी दी जा रही है।
इन सबका निर्माण नाममात्र के खर्च पर गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन जैसे घर में उपलब्ध पदार्थों से किया जाता है।
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे किसान शिववरण सिंह एवं विनोद ने बताया कि यह प्रशिक्षण जिंदगी व पीढ़ी को बदलने का प्रशिक्षण है।
हम लोग इससे प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रख सकेंगे।
उन्होंने कहा कि हम प्रशिक्षण प्राप्त कर जिले के किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित करेंगे।
प्रशिक्षण में अजगरहा, हरिहरपुर, अगडाल आदि आसपास के गांवों के किसान उपस्थित रहे।

