बाजार की मांग के अनुसार फसलें उगाने पर जोर, बढ़ेगी किसानों की आमदनी

प्राकृतिक खेती पर भी जोर

मध्य प्रदेश में खरीफ 2026 से किसानों की आय बढ़ाने के लिए बाजार आधारित फसलों, उद्यानिकी, फूड प्रोसेसिंग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इस संबंध में कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों की आय और उनके कृषि कारोबार को दोगुना करने के लक्ष्य पर तेजी से काम किया जा रहा है।

इसी क्रम में आगामी खरीफ सीजन और किसानों की आर्थिक उन्नति को ध्यान में रखते हुए उज्जैन स्थित सिंहस्थ मेला कार्यालय सभागार में एक उच्च स्तरीय संभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने की।

बैठक में पारंपरिक खेती के बजाय बाजार की मांग पर आधारित फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर विशेष जोर दिया गया।

साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने पर भी चर्चा की गई।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचार, बीज उत्पादन और कृषि उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को पूसा अरहर जैसी उन्नत किस्मों की जानकारी दी जाए और अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाए।

 

सिंहस्थ की तैयारी में बड़ा फैसला

250 हेक्टेयर में होगी फूलों की खेती, किसानों को मिलेगा जबरदस्त मुनाफा

उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी योजना तैयार की है। बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए जिले में करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती कराने का लक्ष्य तय किया गया है।

इस पहल से जहां महापर्व के दौरान फूलों की स्थानीय आपूर्ति सुनिश्चित होगी, वहीं किसानों के लिए कमाई के नए अवसर भी खुलेंगे।

 

हर जिले में राइपनिंग चैंबर की सुविधा, सुरक्षित और केमिकल रहित फल मिलेंगे

किसानों की फसलों को सुरक्षित रखने और उन्हें बेहतर दाम दिलाने के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

कोल्ड स्टोरेज और राइपनिंग चैंबर: बर्णवाल ने कहा कि सभी जिलों में कम से कम एक आधुनिक राइपनिंग चैंबर अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाए, ताकि फलों को सुरक्षित तरीके से पकाया जा सके और लोगों को केमिकल रहित व सुरक्षित फल मिल सकें।

फूड प्रोसेसिंग यूनिट: उद्यानिकी फसलों जैसे संतरा, आलू, अश्वगंधा, चिया सीड्स और ड्रैगन फ्रूट पर विशेष ध्यान देते हुए जिलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और उनकी मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्व रिकॉर्ड में सुधार: उद्यानिकी विभाग के आयुक्त अरविंद कुमार दुबे ने बताया कि अब उद्यानिकी फसलों का अलग से पंजीयन किया जाएगा। ‘गिरदावरी’ के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में इनके रकबे को अलग से दर्ज किया जाएगा, जिससे सटीक और वास्तविक आंकड़े प्राप्त हो सकेंगे।

 

प्रदेश में यूरिया और NPK का पर्याप्त स्टॉक, ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती

खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर किसान कल्याण विभाग के सचिव निशांत बरबडे ने किसानों को आश्वस्त किया है कि मध्य प्रदेश में यूरिया और एनपीके (NPK) का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। ‘ई-विकास पोर्टल’ के माध्यम से किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध कराई जा रही है।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने सभी कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खाद वितरण केंद्रों पर किसानों के लिए छांव, बैठने और पीने के पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए किसानों को खाद की उपलब्धता और फसल अनुसार उसके सही उपयोग की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नकली बीज और अवैधानिक रूप से कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसानों को किसी तरह का नुकसान न हो।

 

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता डी.पी. आहूजा ने जानकारी दी कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें समय पर खाद, उन्नत बीज और कृषि उपकरणों के लिए पर्याप्त ऋण मिल सके।

उन्होंने बताया कि ऋणी और अऋणी दोनों प्रकार के किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही किसानों की शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में सहकारिता, उद्यानिकी, मंडी बोर्ड और कृषि विभाग के प्रमुख सचिवों व आयुक्तों के साथ-साथ संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ भी उपस्थित रहे।