केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चेन्नई में नारियल किसानों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ बैठक कर नारियल उत्पादन बढ़ाने, नई किस्मों के विकास और किसानों की आय बढ़ाने की योजना पर चर्चा की।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चेन्नई में नारियल उत्पादक किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों और इस क्षेत्र से जुड़े प्रमुख स्टेकहोल्डर्स के साथ एक महत्वपूर्ण पोस्ट बजट संवाद में भाग लिया।
इस दौरान नारियल क्षेत्र के विकास, उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
1.25 करोड़ किसान जुड़े नारियल खेती से
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि देश में लगभग 1 करोड़ 25 लाख किसान नारियल की खेती से जुड़े हुए हैं, जबकि करीब 3 करोड़ लोगों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि नारियल खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि वर्तमान समय में नारियल किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
कई नारियल बाग लगभग 60 वर्ष पुराने हो चुके हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में कमी आई है। इसके अलावा रूट विल्ट और व्हाइट फ्लाई जैसी बीमारियां भी फसल को प्रभावित कर रही हैं।
नई किस्मों और तकनीक पर जोर
इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार नई, उन्नत और रोग-प्रतिरोधी नारियल किस्मों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा और भारत वैश्विक बाजार में नारियल निर्यात के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।
नारियल संवर्धन योजना पर काम
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित नारियल संवर्धन योजना के तहत उत्पादन बढ़ाने, प्रोसेसिंग सुविधाओं के विस्तार और इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार की योजना है कि
- पुराने नारियल बागों के स्थान पर नए बाग लगाए जाएं,
- गुणवत्तापूर्ण नर्सरी विकसित की जाए,
- आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं,
- नारियल उत्पादों में मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा दिया जाए।
किसानों और राज्यों से हो रहा परामर्श
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए किसानों और राज्य सरकारों के साथ व्यापक परामर्श किया जा रहा है।
चर्चा के बाद नारियल संवर्धन बोर्ड की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से विशेष रूप से तमिलनाडु के करीब 28 प्रतिशत किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारत की भाषाई विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सभी क्षेत्रीय भाषाएं अत्यंत समृद्ध और सुंदर हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि संवाद मातृभाषाओं में भी किया जा सकता है, ताकि सांस्कृतिक विविधता और एकता दोनों का सुंदर उदाहरण सामने आए।
