गेहूं की बालियों का काला पड़ना किसानों के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि इसका असर पैदावार और अनाज की गुणवत्ता पर पड़ता है।
यह मुख्य रूप से ‘करनाल बंट’ या ‘अनावृत कंडुआ’ जैसे रोगों से हो सकता है। अनावृत कंडुआ में पूरी बाली काले पाउडर जैसी दिखने लगती है।
छूने पर काला पाउडर हाथ में लग जाता है और दाने नहीं बनते। करनाल बंट में दाने का कुछ हिस्सा काला पड़ता है और इससे मछली जैसी सड़न की गंध आती है।
विशेषज्ञों की सलाह से ये उपाय मददगार
- प्रभावित बालियों को नष्ट कर दें। जिन बालियों में काला पाउडर दिख रहा है, उन्हें सावधानी से प्लास्टिक की थैली से ढंककर तोड़ लें और खेत से दूर गड्ढे में दबा दें या जला दें। ध्यान रहे कि पाउडर हवा में न उड़े, वरना संक्रमण फैल जाएगा। अगर रोग फैल रहा हो, तो हल्की सिंचाई करें।
- रोग को बढ़ने से रोकने के लिए प्रोपिकोनाजोल 25% ईसी 200 मिली 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। टेबुकोनाजोल 200 मिली फूल आने की अवस्था पर प्रति एकड़ छिड़काव करें। इसके अलावा कार्बेडाजिम 200-250 ग्राम संक्रमण की शुरुआत में उपयोगी।
प्रभावित खेत के गेहूं को अगले साल ही खेत में बार-बार गेहूं न बोएं, बीच में सरसों या चने जैसी फसलें लें। विशेषज्ञों की सलाह पर ऐसी किस्में बोएं जिनमें यह रोग कम लगता हो।
