मटर की एक फली में 13 दाने जबलपुर का खेती मॉडल बना मिसाल

आइसीएआर ने सराहा

फार्मर ऑफ द ईयर बने रामसिंह ठाकुर

प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के सहयोग से जबलपुर के एक किसान ने नेचुरल मल्टीकाफ्ट इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम विकसित किया है।

इस मॉडल के माध्यम से मटर की नई किस्म प्रगति का उत्पादन कर एक फली में 12 से 13 दाने तक प्राप्त किए जा रहे हैं।

मॉडल की सफलता को देखते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आइसीएआर), पूसा, नई दिल्ली ने इसे सराहा है।

किसान ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि खेती को लाभ का स्थायी माध्यम भी बनाया है। इसी उपलब्धि के लिए किसान को 9 दिसम्बर को आइसीएआर फार्मर ऑफ द ईयर-2025 सम्मान से नवाजा गया है।

मटर की उन्नत किस्मः इस मॉडल की खास पहचान मटर की उन्नत प्रगति किस्म है, जिसमें एक फली में 11 से 13 दाने निकल रहे हैं।

इससे प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा रहा है, जो रसायन आधारित पारंपरिक खेती से कहीं अधिक है।

 

बनी पहचान

शहपुरा क्षेत्र में विकसित यह मल्टीक्राफ्ट मॉडल प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें फसल विविधता, मिट्टी की उर्वरता, जैविक इनपुट और जल संरक्षण का संतुलित समन्वय किया गया है।

किसान रामसिंह ठाकुर मटर, गेहूं, चना और मक्का की खेती पूरी तरह प्राकृतिक विधि से करते हैं। फसल में रसायनिक खाद या कीटनाशक का उपयोग नहीं होने से लागत में भी कमी आई है।

 

आइसीएआर करेगा मॉडल को प्रमोट

आईसीएआर, पूसा ने जबलपुर में विकसित इस प्राकृतिक खेती आधारित मल्टीक्राफ्ट मॉडल को देशभर के किसानों के लिए अनुकरणीय बताया है। संस्थान का कहना है कि इसे अन्य राज्यों में भी प्रमोट किया जाएगा।

किसान रामसिंह ठाकुर का कहना है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग किया जाए, तो खेती न केवल टिकाऊ बन सकती है, बल्कि किसानों की आय भी कई गुना बढ़ाई जा सकती है।

 

किसानों को दे रहे खेती की जानकारी

नेचुरल फार्मिंग को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को इसके फायदे और मिट्टी की सेहत में सुधार की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से दी जा रही है। डॉ. एके सिंह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र

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