20 जून के बाद दस्तक देगा मानसून
मध्य प्रदेश में इस साल मानसून कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल, इंदौर और जबलपुर सहित प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
जहां औसत बारिश 37.3 इंच रहती है, वहीं इस बार केवल 30 से 32 इंच तक वर्षा का अनुमान जताया गया है।
मानसून की एंट्री भी इस बार तय समय से 5 से 8 दिन देरी से, यानी 20 जून के बाद होने की संभावना है।
मौसम विभाग के मुताबिक, इंदौर, उज्जैन, सागर और चंबल संभाग के केवल 8 जिलों में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है, जबकि बाकी अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा औसत से कम रह सकती है।
जून महीने में बारिश कमजोर रहने के आसार हैं, हालांकि जुलाई में मानसून कुछ हद तक रफ्तार पकड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कमजोर मानसून के पीछे अल-नीनो प्रभाव एक प्रमुख कारण हो सकता है, जो मानसूनी हवाओं और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करता है।
कम बारिश की स्थिति में फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने के साथ-साथ प्रदेश में पेयजल और सिंचाई संकट गहराने की आशंका भी जताई जा रही है।
इस साल कहां, कैसा रहेगा मानसून?
- मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, ग्वालियर, भिंड, नीमच, दमोह, अनूपपुर, उज्जैन, आलीराजपुर और बड़वानी जैसे जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश होने की संभावना है।
- वहीं, अशोकनगर, सागर, नर्मदापुरम, रायसेन, मंडला, डिंडौरी, खरगोन, बुरहानपुर और नरसिंहपुर में सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत तक कम बारिश हो सकती है।
- इसके अलावा, प्रदेश के बाकी जिलों में करीब 90 प्रतिशत तक औसत बारिश होने का अनुमान जताया गया है।
कम बारिश से उत्पादन घटने और जल संकट की आशंका
प्रदेश में साल 2024 और 2025 में सामान्य से अधिक बारिश हुई थी, जिससे फसलों को काफी फायदा मिला।
सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर करीब 2 क्विंटल तक बढ़ गया था। वहीं गेहूं और चने की फसलों को भी पर्याप्त पानी मिला, जिससे उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
गेहूं की बेहतर पैदावार का ही नतीजा था कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर 104 टन से अधिक गेहूं की खरीद की।
लेकिन इस साल यदि बारिश कम होती है, तो पेयजल के साथ-साथ सिंचाई के लिए भी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
कम बारिश का असर सिर्फ फसलों पर ही नहीं, बल्कि पेयजल संकट के रूप में भी सामने आ सकता है। पिछले साल अच्छी बारिश के बावजूद प्रदेश के कई जिलों में पानी की किल्लत बनी रही।
इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में लोग पानी के लिए सड़कों पर उतर चुके हैं, जबकि कई अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक है। ऐसे में इस साल बारिश कम रहने पर जल संकट और गहरा सकता है।
जून में सामान्य से कम बारिश के संकेत
मौसम विभाग के अनुसार, जून महीने में मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि जुलाई में मानसून कुछ हद तक बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
अल-नीनो के असर से कमजोर पड़ सकता है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार कमजोर मानसून के पीछे प्रमुख वजह अल-नीनो प्रभाव है।
जून महीने में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है, जबकि जुलाई और अगस्त में भी कमजोर से मध्यम स्तर का अल-नीनो बने रहने की संभावना जताई गई है।
अल-नीनो की स्थिति में समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे हवा के पैटर्न में बदलाव आता है। इसका असर वैश्विक स्तर पर बारिश के चक्र पर पड़ता है—कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बन जाती है।
सरल शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो यह प्रशांत महासागर से भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश पर सीधा असर पड़ता है।
