एनपीके अब 2450 रु. में मिलेगा, पोटाश भी 1975 रुपए पर पहुंचा
साल-2026 की खरीफ फसल के लिए विपणन संघ (मार्कफेड) ने खाद की नई कीमतें घोषित कर दी। इसमें यूरिया और डीएपी के अलावा अन्य खाद की कीमतों में 400 से 800 रुपए प्रति बैग बढ़ोतरी हो गई। कल 1 जून से नई कीमतें लागू हो गई।
खाद की बढ़ी हुई कीमतों का असर सीधा खेती की लागत पर पढ़ेगा। यानी किसान को इस साल खेती करने के लिए पिछले साल की तुलना में ज्यादा रुपए खर्च करना पड़ेगी।
अच्छी बात यह है कि डीएपी और यूरिया की कीमत स्थिर है। इस साल भी किसान यूरिया 266.50 रुपए और डीएपी 1350 रुपए में खरीद सकेंगे।
हालांकि विशेषज्ञों के हिसाब से सोयाबीन में यूरिया खाद देने की जरूरत नहीं है। इधर, एनपीके के सारे ब्रांड की कंपनियों ने कीमतें बढ़ा दी।
इनकी कीमतें पिछले एक साल में 400 से 800 रुपए प्रति बैग ज्यादा हो गई है। इसे लेकर मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित भोपाल के महाप्रबंधक ने निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि कोई व्यापारी तय कीमत से ज्यादा रुपए में खाद नहीं बेच सके।
खाद-बीज महंगे तो खेती की लागत भी बढ़ेगी
कौन से खाद की कितने भाव बढ़े
एनपीके (12:32:16) – पिछले साल जून 2025 में 1775 रुपए, करीब 6 माह पहले 1900 और अब बढ़कर 2450 रुपए प्रति बैग (50 किलो) हो गया।
16:16:16 – पिछले साल साल जून 2025 में 1600 रुपए, करीब 6 माह पहले 1725 रुपए और अब बढ़कर 2050 रुपए प्रति बैग।
पोटाश – जून 2025 में 1500 रुपए, करीब 6 माह पहले 1800 और अब नई कीमत बढ़कर 1975 रुपए प्रति बैग हो गई।
24:24:24 –1900 रु. से बढ़कर 2300 रुपए प्रति बैग।
19:19:19 –1600 रुपए से बढ़कर 2400 रुपए प्रति बैग अब भाव हो गए हैं।
पर्याप्त स्टॉक का दावा
उप संचालक कृषि यूएस तोमर ने दावा किया है कि जिले में फिलहाल खाद का पर्याप्त स्टॉक है।
यूरिया 13 हजार, डीएपी 12 हजार, एनपीके 11 हजार एमटी सहित कुल 41 हजार एमटी खाद अलग अलग दुकानों व सोसायटियों में रखा है।
तोमर ने बताया जिले में खाद की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसे खरीदने के लिए किसान पहले अपनी फार्मर आईडी बनवा लें।
इसके बाद ई-विकास प्रणाली के माध्यम से सीधे ऑनलाइन ही जरूरत के मुताबिक खाद बुक करवा लें।
प्रति 10 बैग पर करीब 5 हजार रुपए का बढ़ना है बोझ
एनपीके व पोटाश की प्रति 10-12 बैग (50 किलो) की खरीदी पर किसानों पर करीब 5 हजार रुपए का बोझ बढ़ जाएगा। इसके साथ बीज की कीमतें भी 10 हजार के पार पहुंच गई।
खाद-बीज दोनों महंगे होने से खेती की लागत भी बढ़ेगी। जो किसानों के लिए घाटे का सौदा रहेगा।
