एमपी में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द खरीदी के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू

मध्य प्रदेश के ई-उपार्जन पोर्टल पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की एमएसपी खरीदी के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है।

किसान यहां अंतिम तिथि, आवश्यक दस्तावेज, ₹600 बोनस और फेस ऑथेंटिकेशन से जुड़े नए नियमों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश के मूंग और उड़द उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर है। शासन के निर्देशानुसार भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत ई-उपार्जन पोर्टल पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द के पंजीयन की प्रक्रिया 25 मई से शुरू कर दी गई है।

इस योजना के अंतर्गत बुवाई करने वाले किसान शासकीय अवकाश को छोड़कर अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से ई-उपार्जन पोर्टल पर जाकर आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

 

15 जून पंजीयन की अंतिम तिथि, जानें खरीदी का पूरा गणित

खाद्य एवं कृषि विभाग के अनुसार पंजीयन की आखिरी तारीख 15 जून 2026 निर्धारित की गई है।

इस बार सरकार द्वारा मूंग की कुल उत्पादन मात्रा का 25 प्रतिशत और उड़द की शत-प्रतिशत उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाएगी।

उड़द उत्पादकों के लिए इस बार खास फायदा है। किसानों को MSP के साथ-साथ ₹600 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा, जिससे उन्हें दोगुना लाभ मिलने की संभावना है।

 

यहां भी करा सकते हैं पंजीयन (Registration Centers)

किसान अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। इसके अलावा वे सरकार द्वारा संचालित विभिन्न सुविधा केंद्रों पर जाकर भी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

इनमें प्रमुख रूप से ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय, सहकारी समितियों के सुविधा केंद्र और एमपी ऑनलाइन (MP Online) कियोस्क शामिल हैं।

 

आवश्यक दस्तावेज

पंजीयन कराने के लिए किसानों को निम्न दस्तावेज साथ रखने होंगे:

  • आधार कार्ड
  • आधार से लिंक मोबाइल नंबर
  • भूमि संबंधी दस्तावेज (भू-अधिकार ऋण पुस्तिका/खसरा)
  • फोटो पहचान पत्र

वहीं सिकमी एवं वन पट्टाधारी किसानों को आधार कार्ड, आधार लिंक मोबाइल नंबर, वन पट्टा तथा सिकमी अनुबंध की प्रति प्रस्तुत करनी होगी।

 

फेस ऑथेंटिकेशन और नॉमिनी के नए नियम

पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए इस बार खरीदी केंद्रों पर उपज बेचने से पहले किसानों की पहचान का सत्यापन अनिवार्य किया गया है।

इसके लिए बायोमेट्रिक पीओएस मशीन या मोबाइल ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा प्रमाणीकरण) किया जाएगा।

अगर किसान स्वयं खरीदी केंद्र पर नहीं पहुंच पाते हैं, तो उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

पंजीयन के दौरान किसान अधिकतम तीन अधिकृत व्यक्तियों (नॉमिनी) के नाम और उनके पहचान पत्र नंबर दर्ज कर सकते हैं।

ये अधिकृत व्यक्ति किसान की उपज लेकर केंद्र पर जा सकेंगे, लेकिन वहां उनका भी फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

 

सीधे बैंक खाते में होगा भुगतान

किसानों से खरीदी गई फसल का भुगतान सीधे उनके पहचान पत्र से लिंक बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से किया जाएगा।

इसलिए खाद्य एवं कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खाते और मोबाइल नंबर को समय रहते अपने पहचान पत्र से लिंक करवा लें, ताकि भुगतान में किसी प्रकार की देरी या परेशानी न हो।