किसानों को मिलेगी 2 लाख तक की सब्सिडी
फसलों के लिए सूक्ष्म सिंचाई और सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए सरकार 2 लाख रुपए तक का अनुदान दे रही है। उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने गिनाए फायदे।
किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ ही फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस कड़ी में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सूक्ष्म सिंचाई के साथ सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू की गई है।
मध्य प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और किसानों का सशक्तिकरण राज्य के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सीमित जल संसाधन और बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए अब आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग बन गया है।
शनिवार को भोपाल स्थित प्रमुख उद्यान (गुलाब गार्डन) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उद्यानिकी मंत्री ने बताया कि उद्यानिकी फसलों में “सूक्ष्म सिंचाई के साथ सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली” किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।
क्या है सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली?
यह एक आधुनिक तकनीक है जो मिट्टी और वातावरण की नमी को भांपकर स्वतः काम करती है।
- सटीक सिंचाई: सेंसर मिट्टी में नमी का स्तर मापते हैं और जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई शुरू करते हैं।
- संतुलित उर्वरक: फर्टिगेशन के जरिए पौधों को उतनी ही खाद दी जाती है जितनी उन्हें आवश्यकता होती है, जिससे उर्वरक की बर्बादी रुकती है।
- लागत में कमी: इसमें श्रम लागत कम होती है और खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण मिलता है।
योजना के मुख्य बिंदु और अनुदान (Subsidy)
सरकार इस तकनीक को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पूरे प्रदेश में लागू कर रही है। इसकी मुख्य शर्तें और लाभ नीचे दिए गए हैं:
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विवरण |
जानकारी |
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यूनिट लागत |
4,00,000 रुपए प्रति यूनिट |
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अनुदान (Subsidy) |
50% (अधिकतम ₹2,00,000) |
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पात्रता रकबा |
न्यूनतम 0.250 हेक्टेयर (उद्यानिकी फसलें) |
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लक्ष्य |
प्रदेश के 715 चयनित कृषक |
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योजना का आधार |
एकीकृत बागवानी विकास मिशन MIDH योजना |
715 किसानों के खेतों में लगेगी प्रणाली
उद्यानिकी आयुक्त अरविंद दुबे ने बताया कि प्रदेश में 715 किसानों के खेतों में सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक 597 किसानों के आवेदन विभागीय पोर्टल पर प्राप्त हो चुके हैं। शेष पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि योजना के सफल क्रियान्वयन में मैदानी अमले और जिला अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों से आग्रह किया गया कि वे पात्र किसानों को समय पर मार्गदर्शन दें और विभागीय पोर्टल पर आवेदन शीघ्र दर्ज कराएं।
अपर संचालक किरार ने कहा कि किसानों को तकनीकी सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि संयंत्र स्थापना में किसी प्रकार की देरी न हो।
