खरीफ 2026 सीजन से पहले केंद्र सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। सरकार के अनुसार देश में उर्वरकों का स्टॉक जरूरत से अधिक मौजूद है।
साथ ही यूरिया और डीएपी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात और घरेलू उत्पादन दोनों में वृद्धि की गई है।
आइए जानते हैं देश में यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरकों की मौजूदा उपलब्धता और भंडारण की पूरी स्थिति।
पश्चिम एशिया में तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच भारत सरकार देश की आर्थिक स्थिरता और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित एक उच्चस्तरीय संयुक्त प्रेस वार्ता में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने ईंधन और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर देशवासियों को भरोसा दिलाया।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की उर्वरक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत, स्थिर और सुव्यवस्थित बनी हुई है।
देश में सभी प्रमुख उर्वरकों का कुल भंडार जरूरत से अधिक है और स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है।
खरीफ 2026 के लिए 52 प्रतिशत अग्रिम स्टॉक सुरक्षित
सरकार के अनुसार बेहतर योजना, अग्रिम भंडारण और प्रभावी लॉजिस्टिक्स प्रबंधन के चलते देश में उर्वरकों का रिकॉर्ड स्तर का स्टॉक उपलब्ध है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने राज्यों के साथ समन्वय कर खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन किया है।
- नई गणना के अनुसार यूरिया की आवश्यकता 194.02 लाख मीट्रिक टन से घटाकर 190.32 लाख मीट्रिक टन कर दी गई है,
- जबकि डीएपी की जरूरत 59.17 लाख मीट्रिक टन से कम होकर 56.23 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है।
कुल मिलाकर खरीफ 2026 के लिए देश की उर्वरक आवश्यकता 383.9 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है।
इसके मुकाबले वर्तमान में 199.86 लाख मीट्रिक टन, यानी 52 प्रतिशत से अधिक का स्टॉक पहले से उपलब्ध है, जो सामान्य दिनों के औसत स्तर (करीब 33 प्रतिशत) से काफी अधिक है।
संकट के बाद भी उत्पादन और आयात मजबूत
वैश्विक अस्थिरता और संकट के बावजूद भारत ने घरेलू उत्पादन में वृद्धि की है और साथ ही विदेशी आयात को सुरक्षित रूप से देश के बंदरगाहों तक पहुंचाया है, जिससे उर्वरकों की आपूर्ति व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
आयात और घरेलू उत्पादन का विस्तृत विवरण (लाख मीट्रिक टन में)
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न उर्वरकों की घरेलू उत्पादन, आयात और कुल उपलब्धता इस प्रकार है :
यूरिया (Urea) – घरेलू उत्पादन: 63.67 – आयात (भारतीय बंदरगाहों पर): 15.44 – कुल उपलब्धता: 79.11
डीएपी (DAP) – घरेलू उत्पादन: 8.89 – आयात: 1.43 – कुल उपलब्धता: 10.32
एनपीके (NPK) – घरेलू उत्पादन: 20.29 – आयात: 6.30 – कुल उपलब्धता: 26.59
एसएसपी (SSP) – घरेलू उत्पादन: 11.96 – आयात: 0.00 – कुल उपलब्धता: 11.96
एमओपी (MOP) – घरेलू उत्पादन: 0.00 – आयात: 4.45 – कुल उपलब्धता: 4.45
कुल (Total) – घरेलू उत्पादन: 104.81 – आयात: 27.62 – कुल उपलब्धता: 132.43
नोट: संकट की स्थिति के बावजूद अब तक कुल 132.43 लाख मीट्रिक टन उर्वरक देश के समग्र भंडार (कुल पूल) में जोड़ा जा चुका है।
आगामी सप्लाई के लिए ग्लोबल टेंडर और घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़त
देश में आने वाले महीनों में उर्वरकों की कोई कमी न हो, इसके लिए सरकार ने मजबूत और बहुस्तरीय तैयारी की है।
सुरक्षित खेप : भारत ने ‘स्ट्रैटेजिक ओवरसीज होल्डिंग्स’ (SOH) के तहत करीब 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 15 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 10 लाख मीट्रिक टन एनपीके की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है। ये सभी खेप जून-जुलाई के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है।
वैश्विक निविदा : अतिरिक्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए 17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद हेतु एक और ग्लोबल टेंडर जारी किया जा चुका है।
घरेलू उत्पादन में वृद्धि : मई 2026 में देश में यूरिया का उत्पादन 25.17 लाख मीट्रिक टन रहा, जो मई 2025 की तुलना में 2.80 लाख मीट्रिक टन अधिक है। वहीं डीएपी का उत्पादन मई 2026 में 3.86 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2,000 मीट्रिक टन ज्यादा है।
सब्सिडी का समय पर भुगतान और सख्त निगरानी
प्रेस वार्ता के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उर्वरक विभाग कच्चे माल जैसे फॉस्फोरस और पोटेशियम की उपलब्धता की नियमित साप्ताहिक समीक्षा कर रहा है।
वहीं कृषि विभाग द्वारा खाद कंपनियों के सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान भी साप्ताहिक आधार पर समय पर किया जा रहा है, जिसके लिए सरकार के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध है।
इसके अतिरिक्त, उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अब तक ईजीओएस (EGoS) की 10 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
इन बैठकों के माध्यम से उर्वरक आपूर्ति से जुड़ी अधिकांश चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया है।
