डीएपी खाद केवल फास्फोरस और नाइट्रोजन से मिलकर बनी होती है जबकि एनपीके खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश तीन तरह के पोषक तत्व अलग-अलग अनुपात में होते हैं।
डीएपी यानि की डाई-अमोनियम फॉस्फेट खाद किसानों की पसंदीदा खाद है, किसान अधिकांश फसलों में डीएपी का उपयोग करते ही हैं।
जबकि बाजार में डीएपी खाद के अलावा भी कई विकल्प मौजूद है।
यहाँ तक कि आजकल कृषि विभाग और कृषि विशेषज्ञों द्वारा भी किसानों को फसलों में DAP के स्थान पर अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है। इसमें किसानों को DAP के स्थान पर NPK खाद का भी इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
आइए जानते हैं डीएपी और एनपीके खाद में क्या अंतर है और कौन सी खाद बेहतर है।
डीएपी और एनपीके खाद में कौन है बेहतर
- DAP खाद फास्फोरस और नाइट्रोजन पोषक तत्वों के मिश्रण से बनी है। इसमें फास्फोरस 46 प्रतिशत एवं नाइट्रोजन 18 प्रतिशत होता है जबकि इसमें अन्य पोषक तत्व जैसे पोटाश एवं सल्फर उपलब्ध नहीं है। वहीं NPK खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश तीनों का मिश्रण होता है। एनपीके खाद फसलों की आवश्यकता अनुसार संतुलित मात्रा में विभिन्न उपयुक्त पोषक तत्वों के मिश्रण के साथ बाजार में उपलब्ध है। जैसे NPK 12:32:16, NPK 10:26:26, NPK 19:19:19, NPK 15:15:15, NPK 16:16:16, NPK 20:20:0:13. आदि।
- डीएपी खाद में पोटेशियम तत्व नहीं होने के कारण फसल के उत्पादों की गुणवत्ता एवं उनकी प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव नहीं डालती। वहीं एनपीके खाद में पोटाश की मात्रा एवं कुछ में सल्फर होने के कारण अनाज, सब्जी एवं फलों की गुणवत्ता को बढ़ाने के साथ प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। डीएपी जहाँ जड़ों को मजबूत करने का काम करता है तो वहीं एनपीके पौधों के समग्र विकास, फूल और फल को बढ़ावा देता है।
- DAP खाद केवल एक फार्मूला से तैयार किया गया पारंपरिक उर्वरक है जिससे केवल फास्फोरस एवं नाइट्रोजन एक सीमित अनुपात में फसलों को प्राप्त होता है एवं अपेक्षाकृत महंगा है। जबकि NPK खाद को फसलों जैसे खाद्यान्न एवं दलहन में वेसल डोज के रूप में (12:32:16), कंद एवं तिलहनी फसलों में (10:26:26), सब्जियों, फल एवं फूल फसलों में (16:16:16) गन्ना एवं केला की फसलों में (15:15:15) तिलहनी फसलों के लिए (20:20:0:13) आदि के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
- डीएपी खाद को फसलों की विशेष आवश्यकता के अनुसार तैयार नहीं किया जाता है जिससे इसके प्रयोग से फास्फोरस की उपलब्धता फसल की आवश्यकता से अधिक होती है। वही एनपीके खाद को फसलों की पोषक तत्वों की आवश्यकता के अनुसार बनाया गया है, जिससे फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
- इसके अलावा डीएपी खाद एक परंपरागत उर्वरक है जो एनपीके की तुलना में कम उपयोगी एवं प्रभावी है। वहीं एनपीके फसलों की आवश्यकतानुसार उपयोगी होने के साथ ही आधुनिकतम उर्वरक है।
